डीमैट अकाउंट के नुकसान | Disadvantages of demat account in hindi

डीमैट अकाउंट के नुकसान, Demat account ke nuksan in hindi, Demat account ke nuksan kya hain, Disadvantage of Demat account in hindi, डिमैट खाते के क्या नुकसान हैं?

डीमैट अकाउंट के नुकसान, Disadvantages of demat account in hindi

नमस्ते रीडर्स, आज हम बात करेंगे डीमैट अकाउंट के नुकसान के बारे में। आजकल बहुत सारे लोग डीमैट अकाउंट का यूज अपनी इन्वेस्टमेंट को स्टोर करने के लिए करते हैं, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि डीमैट अकाउंट के जरिए आपकी investment को नुकसान भी हो सकता है?

डीमैट अकाउंट का उपयोग इलेक्ट्रॉनिक फॉर्मेट में शेयर सर्टिफिकेट को स्टोर करने के लिए किया जाता है। इसके जरिये आप अपने shares को किसी भी समय खरीद और बेच सकते हैं लेकिन इसके कुछ नुक्सान भी है जो आपके निवेश पर नेगेटिव असर डाल सकते हैं।

इस पोस्ट में मैं आपको डीमैट अकाउंट के कुछ नुकसान के बारे में बताऊंगा जिससे कि आप अपनी इन्वेस्टमेंट को स्टोर करने से पहले इनके बारे में जान सकें और सही तरीके से इन्वेस्टमेंट डिसीजन ले सकें।

इस पोस्ट में आप जानेंगे की डीमैट अकाउंट के जरिए;

  • कैसे आपके शेयरों की safety को नुकसान भी हो सकता है, आपके शेयरों के हस्तांतरणीयता (transferability) पर कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं
  • और आपके शेयर पर लॉक-इन अवधि का भी प्रभाव पड़ सकता है।
  • साथ ही, आपको ये भी पता चलेगा कि डीमैट अकाउंट के जरिए आपके शेयरों की ओनरशिप ट्रांसफर करना भी काफी मुश्किल हो सकता है
  • और आपके शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव पर भी असर पड़ सकता है।

अगर आप अपने डीमैट खाते से जुड़े हुए सभी नुकसान को जानना चाहते हैं तो मेरी आपसे गुजारिश है कि इस पोस्ट को आज तक जरूर पढ़ना.

इस पोस्ट में आप जानेंगे-

डीमैट अकाउंट के नुकसान (Disadvantages of demat account in hindi)

डीमैट खाते के कुछ नुकसान है जो निवेशकों को पता होना चाहिए। सबसे बड़ा नुकसान है यह कि अगर आपका डीमैट अकाउंट हैक हो जाता है, तो आपके निवेश को खतरा हो सकता है।

इसके अलावा, अगर आपके ब्रोकर या डिपॉजिटरी पर कोई भी घोटाला (scam) होता है, तो आपका पैसा भी खतरे में हो सकता है।

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कुछ लोगों को डीमैट खाते का उपयोग करना मुश्किल लगता है और उनके लिए ये प्रक्रिया काफी जटिल यानी complicated हो सकती है।

डीमैट खाते में शेयरों की transferability और लाभांश भुगतान (dividend payment) में भी कुछ चुनौतियां हो सकती हैं। इसलिए, आपको सही तरीके से अपने investments को मॉनिटर करना चाहिए और सही ब्रोकर की मदद लेनी चाहिए।

नीचे हमने एक-एक करके demat account के क्या-क्या नुकसान हो सकते हैं, उन सभी के बारे में उदाहरण के साथ बताया है इसीलिए इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ना. डिमैट खाते के disadvantages का सबसे पहला पॉइंट है–

1. डीमैट अकाउंट की फीस और चार्जेस से नुकसान

डीमैट अकाउंट की फीस और चार्जेस के कारण आपके पैसे कम हो सकते हैं। जब आप एक डीमैट अकाउंट खोलते हैं तो उसके लिए आपको ब्रोकर या बैंक को फीस देनी होती है।

इसके अलावा, आपको डीमैट खाते को maintain करने के लिए वार्षिक शुल्क (yearly charges) भी देना पड़ता है।

मतलब अगर आपके डीमैट अकाउंट में शेयर नहीं है और आप सिर्फ fees और charges pay कर रहे हैं तो आपके पैसे खत्म हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए,

  • मान लीजिये आपने एक डीमैट अकाउंट खोला है और आपके पास कोई शेयर नहीं है लेकिन आपको डीमैट अकाउंट मेंटेन करने के लिए 500 रुपये वार्षिक शुल्क देना पड़ता है।
  • अगर आप इसको 3 साल तक मेंटेन करते हैं, तो आपने सिर्फ अकाउंट मेंटेन करने के लिए 1500 रुपये खर्च कर दिए हैं।

इस case में आपको कोई फायदा नहीं मिला और आपके पैसे भी खर्च हो गए। इसलिए, आपको डीमैट खाता खोलने से पहले उसके सभी शुल्क यानी charges को ध्यान में रखना चाहिए।

2. डीमैट अकाउंट में शेयर की वैल्यू गिरने से नुकसान

डीमैट अकाउंट में शेयर की वैल्यू गिरने से आपको नुक्सान हो सकता है। डीमैट खाते में शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप से होल्ड किए जाते हैं। अगर शेयर मार्केट में आपके शेयर की वैल्यू गिरने लगती है तो आपके डीमैट अकाउंट में भी शेयर की वैल्यू कम हो जाएगी।

इस case में, अगर आप अपने shares को बेचना चाहते हैं तो आपको नुक्सान उठाना पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए,

  • मान लीजिए कि आपके डीमैट अकाउंट में 100 शेयर हैं और उनकी प्रत्येक शेयर की वैल्यू भी 100 रुपये है।
  • लेकिन मार्केट की खराब कंडीशन के कारण आपके शेयर की वैल्यू 100 से घटकर 80 रुपये हो जाती है।

तो ऐसे में, अगर आप अपने शेयर को बेचने का फैसला लेते हैं तो आपको 20 रुपये प्रति शेयर का नुकसान उठाना पड़ेगा।

इसीलिए, डीमैट अकाउंट में शेयरों की वैल्यू का नुकसान होने से बचने के लिए मार्केट कंडीशंस और शेयरों के परफॉर्मेंस को नियमित रूप से मॉनिटर करना चाहिए।

3. डीमैट खाते से शेयर चोरी होने का खतरा

अगला बड़ा नुकसान यह है कि डीमैट अकाउंट की सुरक्षा कमजोर होने से हैकर्स आपके शेयर चुरा सकते हैं। डीमैट अकाउंट ऑनलाइन प्लेटफॉर्म होता है, जिसके कारण हैकर्स आपके डीमैट अकाउंट में access प्राप्त कर सकते हैं।

मतलब अगर आपके डीमैट अकाउंट की सिक्योरिटी कमजोर है, तो हैकर्स आपके शेयर को चुरा सकते हैं या आपके अकाउंट से शेयर ट्रांसफर कर सकते हैं। इसलिए, डीमैट खाते की सुरक्षा का ध्यान रखना बहुत जरूरी है।

उदाहरण के लिए, अगर आप अपने डीमैट अकाउंट का पासवर्ड या login credentials किसी के साथ शेयर करते हैं या उनको किसी प्रकार के साइबर अटैक से सिक्योर नहीं रखते हैं, तो हैकर्स आपके डीमैट अकाउंट में आसानी से access प्राप्त कर सकते हैं।

तो इस मामले में वो आपके शेयर को चुरा सकते हैं और आपको नुकसान पहुंचा सकते हैं। इसलिए आपके डीमैट खाते का पासवर्ड मजबूत होना चाहिए और उसे नियमित रूप से बदलते रहना चाहिए। साथ ही, antivirus और firewall जैसे साइबर सुरक्षा tools का उपयोग भी करना चाहिए।

4. डिमैट अकाउंट मैनेज करना मुश्किल होता है

तीसरा डिमैट अकाउंट का नुकसान यह है कि अगर आपके डीमैट अकाउंट में मल्टीपल सिक्योरिटीज हैं तो उन्हें मैनेज करना काफी मुश्किल हो सकता है। डीमैट खाते में एक साथ multiple securities होल्ड किए जा सकते हैं।

लेकिन अगर आपके डीमैट अकाउंट में बहुत सारे सिक्योरिटीज हैं तो उन्हें मैनेज करना मुश्किल हो सकता है। इसलिए, आपको नियमित रूप से अपने डीमैट खाते को मॉनिटर करना चाहिए।

उदाहरण के लिए,

  • अगर आपके डीमैट अकाउंट में 10 अलग-अलग कंपनियों के शेयर हैं तो उन्हें ट्रैक करना आपके लिए थोड़ा मुश्किल हो सकता है
  • क्योंकि हर कंपनी के शेयरों का प्रदर्शन और बाजार की स्थितियों को नियमित रूप से मॉनिटर करना आपके लिए चुनौतीपूर्ण हो सकता है।

इसलिए, आपको regularly अपने डीमैट अकाउंट में शेयरों की परफॉर्मेंस को चेक करना चाहिए और शेयरों को मैनेज करने के लिए प्रोफेशनल गाइडेंस भी लेनी चाहिए।

5. शेयर ट्रेडिंग चार्जेस से नुकसान

डीमैट अकाउंट का अगला नुकसान यह है कि इसमें शेयर ट्रेंडिंग (बेचने और खरीदने के चार्ज) आपके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं। जब आप डीमैट अकाउंट से शेयर खरीदते या बेचते हैं तो उसके लिए ब्रोकर को कमीशन देना होता है।

अगर आप बहुत सारे लेन-देन करते हैं तो कमीशन चार्ज (commission charges) आपके लिए नुकसानदायक हो सकता है।

उदाहरण के लिए,

  • अगर आपने एक डीमैट अकाउंट खोला है और आप नियमित रूप से शेयर buy और sell करते हैं, तो आपको हर ट्रांजैक्शन के लिए ब्रोकर को कुछ कमीशन देना होगा।
  • अगर आपके लेन-देन की संख्या अधिक है तो आपके पैसे कम होने के चांस भी अधिक हो सकते हैं।

इसलिए, आपको अपने transactions यानी लेनदेन की संख्या को कंट्रोल में रखना चाहिए और ब्रोकर के चार्ज को compare करना चाहिए। साथ ही, आपको लॉन्ग-टर्म इन्वेस्टमेंट को prefer करना चाहिए, ताकि ट्रांजैक्शन की संख्या कम हो सके।

6. डिमैट अकाउंट में वार्षिक मेंटेनेंस चार्ज देना पड़ता है

डीमैट खाते के लिए वार्षिक रखरखाव शुल्क (AMC charges) भी आपके लिए नुकसान दायक हो सकते हैं। डीमैट अकाउंट के मेंटेनेंस के लिए ब्रोकर्स आपसे सालाना फीस चार्ज करते हैं।

अगर आपके डीमैट अकाउंट में बहुत कम शेयर हैं या आपके शेयर का वैल्यू बहुत कम है तो आपके लिए AMC चार्ज नुकसानदायक हो सकते हैं।

उदाहरण के लिए, अगर आपके डीमैट अकाउंट में कम शेयर है या आपके शेयर की वैल्यू बहुत कम है तो आपके लिए AMC Charges को हैंडल करना थोड़ा मुश्किल हो सकता है।

इसलिए, अगर आपके निवेश बहुत कम है तो आपको डीमैट खाता खोलने से पहले ब्रोकर की फीस के बारे में सोचना चाहिए। साथ ही, आपको नियमित आधार पर अपने डीमैट खाते की गतिविधि की जांच करके एएमसी शुल्कों को कंट्रोल में रखना चाहिए।

7. डीमैट अकाउंट वेरीफिकेशन प्रोसेस टाइम कंजूमिंग है

कभी-कभी डीमैट खाते की सत्यापन प्रक्रिया (verification process) बहुत समय लेने वाली और जटिल यानी complicated हो सकती है।

जब आप डीमैट खाता खोलते हैं तो ब्रोकर आपकी पहचान और पता सत्यापन के लिए document मांगता है। वेरीफिकेशन प्रोसेस बहुत समय लेने वाली और जटिल हो सकती है। अगर आपके पास सही दस्तावेज नहीं है तो सत्यापन प्रक्रिया और भी मुश्किल हो सकती है।

उदाहरण के लिए, अगर आपका पैन कार्ड या आधार कार्ड सही नहीं है या आपका करेंट एड्रेस प्रूफ नहीं है तो आपके डीमैट अकाउंट का वेरिफिकेशन प्रोसेस काफी मुश्किल हो सकता है।

वेरिफिकेशन प्रोसेस में काफी टाइम लग सकता है और इसमें आपको डॉक्युमेंट्स को अपडेट करने के लिए और औपचारिकताएं पूरी करने के लिए ज्यादा टाइम और पैसे खर्च करना पड़ सकता है। इसलिए, डीमैट अकाउंट ओपन करने से पहले आपके सारे डॉक्यूमेंट तैयार होने चाहिए।

8. डिमैट खाते की सिक्योरिटीज में फ्रॉड होने का खतरा

डीमैट खाते का अगला बड़ा नुकसान यह है कि डीमैट अकाउंट के जरिए सिक्योरिटीज में फ्रॉड होने का भी खतरा बना रहता है।

मतलब डीमैट अकाउंट को unauthorized access से हैक किया जा सकता है। अगर ऐसा होता है तो आपके शेयर की वैल्यू कम हो सकती है या आपके शेयर में कुछ उलझने भी पैदा हो सकती है।

  • उदाहरण के लिए, अगर आपका डीमैट अकाउंट हैक हो जाता है तो आपके शेयर का प्राइस कम हो सकता है या फिर आपके शेयर से कुछ अनधिकृत लेनदेन भी हो सकते हैं जो आपके लिए नुक्सान दायक हो सकता है।

इसलिए, आपको अपने डीमैट अकाउंट की सिक्योरिटी को रेगुलर मॉनिटर करना चाहिए और ज्यादा ट्रांजेक्शन करने से बचना चाहिए। साथ ही, आपको मजबूत पासवर्ड का इस्तेमाल करना चाहिए और अपने डीमैट अकाउंट में 2-factor authentication इनेबल करना चाहिए।

9. डीमैट अकाउंट में शेयर उतार-चढ़ाव से नुकसान

अगला डीमैट अकाउंट का नुकसान है कि इसमें शेयरों में उतार-चढ़ाव का जोखिम बना रहता है। मतलब शेयर्स की वैल्यू में मार्केट के up down के हिसाब से fluctuations होता है। तो अगर मार्केट में किसी शेयर का वैल्यू कम हो जाता है तो उसका इम्पैक्ट आपके स्टॉक पोर्टफोलियो पर भी पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर मार्केट में आपके द्वारा खरीदा किसी कंपनी का शेयर प्राइस बहुत ज्यादा गिर जाता है तो उसका इम्पैक्ट आपके निवेश पर पड़ सकता है।

इसलिए, शेयर में निवेश करने से पहले आपको मार्केट का एनालिसिस करना चाहिए और शेयर के पिछले परफॉर्मेंस को भी चेक करना चाहिए। साथ ही, आपको अपने निवेश को डायवर्सिफाइड रखना चाहिए, ताकि बाजार के उतार-चढ़ाव का जोखिम कम हो सके।

10. रेगुलर डिमैट अकाउंट स्टेटमेंट चेक करना होता है

आपको रेगुलर bases पर डीमैट अकाउंट स्टेटमेंट चेक करना चाहिए। अगर आप अपने डीमैट खाते का स्टेटमेंट नियमित रूप से नहीं चेक करते हैं तो आपके शेयरों का मूल्य कम हो सकता है या आपके शेयरों पर कोई अनधिकृत लेनदेन भी हो सकता है।

उदाहरण के लिए,

  • अगर आप अपने डीमैट खाते का स्टेटमेंट नियमित रूप से चेक नहीं करते हैं तो आपको पता नहीं चलेगा कि आपके शेयरों का मूल्य कम हो रहा है या फिर कोई अनधिकृत लेनदेन हो रहा है।

इसलिए, आपको नियमित आधार पर अपने डीमैट खाते का स्टेटमेंट चेक करते रहना चाहिए और अपनी गतिविधि को मॉनिटर करना चाहिए। साथ ही, आपको अपने डीमैट खाते की गतिविधि को मॉनिटर करने के लिए ईमेल/एसएमएस अलर्ट को भी activate करना चाहिए।

11. बहुत सारे अन्य डीमैट चार्जेस देने पड़ते हैं

डीमैट अकाउंट का एक और नुकसान ये भी है कि आपको ब्रोकर की फीस के अलावा और भी कई सारे चार्जेज जैसे कि ट्रांजैक्शन चार्जेज, डीपी चार्जेज, प्लेज चार्जेज आदि का पेमेंट करना पड़ सकता है। अगर आप बहुत ज्यादा ट्रांजैक्शन करते हैं तो ये चार्ज आपके लिए नुकसान दायक हो सकते हैं।

  • उदाहरण के लिए, अगर आपके डीमैट अकाउंट में बहुत ज्यादा ट्रांजेक्शन हो रहे हैं तो आपको transaction charges, DP charges, pledge charges जैसे चार्ज भी pay करना पड़ सकता है।

अगर आपको इसके बारे में सही जानकारी नहीं है तो आपके लिए ये चार्ज बहुत नुकसान दायक हो सकते हैं। इसलिए, डीमैट खाता खोलने से पहले आपको इन चार्जेस को समझना चाहिए और सही ब्रोकर को चुनना चाहिए।

12. डीमैट खाते से ओनरशिप ट्रांसफर करना मुश्किल है

डीमैट अकाउंट के नुकसान की लिस्ट में अगला नुकसान है कि आपको अपने खाते से शेयरों का ओनरशिप ट्रांसफर करना भी काफी मुश्किल होता है।

अगर आपके पास फिजिकल शेयर हैं तो आपको उन्हें डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए फिजिकल शेयर को demat form में भरना पड़ता है। इस प्रोसेस में कई errors हो सकती हैं और आपके शेयरों का ownership transfer होने में काफी समय लग सकता है।

उदाहरण के लिए,

  • अगर आपके पास physical shares हैं तो आपको उनको डीमैट अकाउंट में ट्रांसफर करने के लिए फिजिकल शेयर को डीमैट फॉर्म में fill करना पड़ेगा।
  • अगर आपने फॉर्म को सही तरीके से fill नहीं किया तो इसमें error हो सकते हैं और आपके शेयर का ओनरशिप ट्रांसफर होने में टाइम लग सकता है।

इसलिए, आपको सही तरीके से डीमैट फॉर्म को भरना चाहिए और सही ब्रोकर की मदद लेनी चाहिए।

13. लॉक इन पीरियड से नुकसान होता है

डीमैट अकाउंट के जरिए आपके शेयर पर लॉक-इन पीरियड का भी impact हो सकता है। अगर आप किसी आईपीओ में निवेश करते हैं और उसका Lock-in-period है तो आप उसे लॉक-इन पीरियड के बिना बेच नहीं सकते हैं। इसलिए, लॉक-इन अवधि का प्रभाव आपके investment strategy पर भी पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए, अगर आपने किसी IPO में निवेश किया है और उसका लॉक-इन पीरियड है तो आप उसे लॉक-इन पीरियड के बिना बेच नहीं सकते हैं।

इसका मतलब है कि आपकी निवेश पर लॉक-इन अवधि का प्रभाव पड़ सकता है और आपकी निवेश रणनीति भी इस पर निर्भर करेगी। इसलिए, आपको सही तरीके से आईपीओ के लिए रिसर्च करना चाहिए और सही निवेश रणनीति बनानी चाहिए।

14. डीमैट अकाउंट से शेयर ट्रांसफर करने पर प्रतिबंध

डीमैट खाते के माध्यम से आपके शेयरों की हस्तांतरणीयता यानी transferability पर भी कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं। अगर आपके शेयर में कोई लीगल इश्यू हो जाता है तो उससे शेयर की ट्रांसफरेबिलिटी पर भी नेगेटिव इम्पैक्ट पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए,

  • अगर आपके shares में कोई legal issue हो जाता है तो उससे शेयर की transferability पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
  • इसका मतलब है कि अगर आपके शेयर में कोई लीगल इश्यू है तो आप उन्हें ट्रांसफर नहीं कर सकते और उन्हें बेच भी नहीं सकते।

इसलिए, आपको सही तरीके से अपना निवेश को मॉनिटर करना चाहिए और सही ब्रोकर की हेल्प लेनी चाहिए। साथ ही, आपको अपने निवेश को डायवर्सिफाइड रखना चाहिए, जिसके आपके शेयर की हस्तांतरणीयता पर नेगेटिव प्रभाव कम हो सके।

15. डिमैट खाते में शेयर प्राइस वोलैटिलिटी का रिस्क

डीमैट अकाउंट का आखिरी नुकसान यह है कि आपके शेयरों की price volatility पर भी impact हो सकता है। शेयरों की कीमत बाजार की स्थिति और कंपनी के प्रदर्शन के हिसाब से ऊपर नीचे होती है।

इसलिए, अगर आप shares को डीमैट अकाउंट में स्टोर करके रखते हैं तो उनके prices पर भी impact पड़ सकता है।

उदाहरण के लिए,

  • अगर मार्केट में कोई नेगेटिव न्यूज आती है या कंपनी की परफॉर्मेंस डाउन हो जाती है तो शेयरों का प्राइस भी डाउन हो सकता है।
  • इस स्थिति में अगर आपके डीमैट खाते में शेयर हैं तो उनके मूल्य पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

इसलिए, आपको बाजार की स्थिति और कंपनी की परफॉर्मेंस को मॉनिटर करते रहना चाहिए और सही तरीके से निवेश का फैसला लेना चाहिए।

उम्मीद करता हूं आपको ऊपर बताए गए सभी डीमैट अकाउंट के नुकसान के बारे में पता चल गया होगा चलिए अब इस टॉपिक से जुड़े हुए कुछ बेसिक सवाल और उनके जवाब जान लेते हैं–

FAQ’s (Demat account ke nuksan in hindi)

डीमैट अकाउंट के नुकसान क्या है?

डीमैट खाते के कई नुकसान हैं जैसे; सिक्योरिटी चोरी होने खतरा, ब्रोकर या डिपॉजिटरी पर घोटाला होने से पैसे खतरे में, जटिल प्रक्रिया, हस्तांतरणीयता और लाभांश भुगतान में चुनौतियां आदि डिमैट अकाउंट के कुछ नुकसान हैं।

क्या डीमैट खाता खोलना सुरक्षित है?

अगर आप भरोसेमंद ब्रोकर के पास डिमैट अकाउंट खोलते हैं तो यह सुरक्षित है लेकिन अगर आप डिमैट खाता खोलने के बाद लंबे समय तक एक्टिव नहीं रहते हैं मतलब शेयर खरीदते बेचते नहीं हैं तो आपको नुकसान हो सकता है।

क्या डीमैट खाता बंद करना जरूरी है?

डीमैट खाता बंद करना जरूरी नहीं है लेकिन अगर आपको शेयर खरीदने-बेचने की जरूरत नहीं है, तो आप डीमैट अकाउंट बंद कर सकते हैं। लेकिन अगर आप फ्यूचर में शेयर खरीदना-बेचना चाहते हैं, तो डीमैट अकाउंट दोबारा खोलने की जरूरत होगी।

कौन सा डीमैट खाता सबसे सुरक्षित है?

इंडिया में अपस्टॉक्स (Upstox) और जीरोधा (Zerodha) दो सबसे भरोसेमंद और सुरक्षित डीमैट खाता माने जाते हैं। और इन दोनों ब्रोकर्स के पास ही सबसे ज्यादा निवेशकों ने शेयर मार्केट में डिमैट अकाउंट खोले हुए हैं।
डीमैट खाते के माध्यम से

शेयरों की हस्तांतरणीयता पर क्या प्रतिबंध हो सकते हैं?

डीमैट खाते के माध्यम से शेयरों की हस्तांतरणीयता पर कुछ प्रतिबंध हो सकते हैं। इसीलिए आपको अपने शेयर को ट्रांसफर करने से पहले ब्रोकर के नियम और शर्तों को ध्यान से पढ़ना चाहिए।

डीमैट अकाउंट में हम कितना पैसा रख सकते हैं?

डीमैट अकाउंट में आप जितना चाहें उतना पैसा रख सकते हैं। लेकिन अगर आपका खाता निष्क्रिय है और आप उसमें कोई लेनदेन नहीं करते हैं, तो आपको वार्षिक रखरखाव शुल्क (AMC) देना पड़ सकता है।

क्या डीमैट अकाउंट में शेयरों का मालिकाना हक ट्रांसफर करना मुश्किल हो सकता है?

हां, डीमैट अकाउंट में शेयरों का मालिकाना हक यानी ownership ट्रांसफर करना मुश्किल हो सकता है। इसीलिए अगर आप अपने शेयर का ओनरशिप ट्रांसफर करना चाहते हैं तो आपको अपने ब्रोकर की मदद लेनी चाहिए।

डीमैट खाता शुल्क क्या है?

डीमैट खाता शुल्क आपके डिमैट अकाउंट पर लगने वाले फीस और चार्जेस होते हैं जिसमें खाता खोलने का शुल्क, वार्षिक रखरखाव शुल्क (एएमसी), लेनदेन शुल्क और अन्य शुल्क जैसे डीमैटरियलाइजेशन (डीमैट) शुल्क, गिरवी शुल्क और SMS शुल्क शामिल हैं।

डीमैट खाते के माध्यम से निवेश को डायवर्सिफाई करना क्यों जरूरी है?

डीमैट खाते के माध्यम से investments को डायवर्सिफाई करना बहुत जरूरी होता है ताकि आपके शेयरों की हस्तांतरणीयता पर नकारात्मक प्रभाव कम हो। विविधीकरण से आप अपने निवेश को विभिन्न क्षेत्रों में निवेश करके स्प्रेड कर सकते हैं।

क्या डीमैट अकाउंट के जरिए शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव पर असर पड़ सकता है?

हां, डीमैट अकाउंट के जरिए शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव पर असर पड़ सकता है। शेयरों की कीमत बाजार की स्थिति और कंपनी के प्रदर्शन के हिसाब से उतार-चढ़ाव करता है। इसलिए, अगर आप शेयर को डीमैट अकाउंट में स्टोर करके रखते हैं तो उनके दाम पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

डीमैट अकाउंट के नुकसान – ‘निष्कर्ष’

इस पोस्ट में हमने आपको डीमैट अकाउंट के नुक्सान के बारे में जानकारी दी है। जिसमें आपने जाना कि जब आप अपना निवेश को डीमैट खाते में स्टोर करते हैं तो इसके जरिये आपके निवेश की सुरक्षा को कई नुकसान हो सकते हैं।

इसलिए, आपको समय-समय पर अपनी इन्वेस्टमेंट को ट्रैक करते रहना चाहिए और सही जगह डिमैट अकाउंट खोलना चाहिए। साथ ही आपको अपने निवेश को डायवर्सिफाइड रखना चाहिए ताकि किसी एक शेयर की वैल्यू बहुत ज्यादा कम होने पर उसका असर आपके पूरे पोर्टफोलियो इन्वेस्टमेंट पर ना पड़े।

आपको ये भी ध्यान में रखना चाहिए कि डीमैट अकाउंट के जरिए आपके शेयरों का ओनरशिप ट्रांसफर करना भी मुश्किल हो सकता है और आपके शेयरों की कीमत में उतार-चढ़ाव पर भी असर पड़ सकता है। इसलिए, आपको बाजार की स्थिति और कंपनी की परफॉर्मेंस को समय-समय पर चेक करते रहना चाहिए और सही तरीके से निवेश का फैसला लेना चाहिए।

हम उम्मीद करते हैं कि हमारी यह पोस्ट डिमैट अकाउंट के नुकसान (disadvantages of demat account in hindi) उपयोगी लगी होगी।

अगर आपका इस टॉपिक से संबंधित कोई भी सवाल है तो नीचे कमेंट बॉक्स में जरूर पूछिए।

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मेरा नाम दीपक सेन है और मैं इस वेबसाइट का Founder हूं। यहां पर मैं अपने पाठकों के लिए नियमित रूप से शेयर मार्केट, निवेश और फाइनेंस से संबंधित उपयोगी जानकारी शेयर करता हूं। ❤️