20 म्यूचुअल फंड के नुकसान जो हर एक निवेशक को पता होना चाहिए!

म्यूचुअल फंड के नुकसान, Mutual fund ke nuksan in hindi, Mutual fund ke nuksan kya hain, Disadvantage of mutual fund in hindi, म्यूचुअल फंड निवेश के जोखिम, म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट के क्या नुकसान हैं?

म्यूचुअल फंड के नुकसान, Disadvantages of Mutual fund in Hindi

म्यूचुअल फंड एक पॉपुलर इन्वेस्टमेंट ऑप्शन है, जिसमें निवेशक अपने पैसे को एक साथ कई कंपनियों में निवेश कर सकते हैं। म्यूचुअल फंड का concept बहुत सिंपल है और उसमें निवेश करने के बहुत सारे फायदे भी हैं लेकिन इसके साथ साथ कुछ नुक़सान भी है, जिनके बारे में निवेशकों को पता होना चाहिए।

इस पोस्ट में हम म्यूचुअल फंड के नुकसान के बारे में बात करेंगे, जिससे निवेशक अपने निवेश निर्णयों को सही तरीके से प्लान कर सकें।

इस पोस्ट से आपको म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़े जोखिमों के बारे में details में पता चलेगा, जिससे आप अपने निवेश निर्णयों को अच्छे से प्लान कर पाएंगे।

आज हम आपको mutual fund के सारे जोखिमों को विस्तार से समझाएंगे और साथ ही कुछ टिप्स भी देंगे, जिससे निवेशक अपनी निवेश रणनीति को सही तरीके से develop कर सकते हैं।

अगर आप एक म्यूचुअल फंड निवेशक है या mutual fund में कैसा इन्वेस्ट करना चाहते हैं, तो इस पोस्ट को पढ़ कर आप अपने investment decision को और भी अच्छे से plan कर सकते हैं और अपने पैसे को सही जगह निवेश करके अपना financial goal हासिल कर सकते हैं।

इस पोस्ट में आप जानेंगे-

म्यूचुअल फंड के नुकसान (Disadvantages of Mutual fund in Hindi)

म्यूचुअल फंड के नुकसान की कई वजह हो सकती हैं जैसे; मार्केट कंडीशन विपरीत होने से mutual fund का अच्छा परफॉर्म ना करना, निवेश को अलग-अलग सेक्टर में डायवर्सिफाई ना करना, क्रेडिट रिस्क इन्फ्लेशन का प्रभाव और लिक्विडिटी प्रॉब्लम आदि म्यूचुअल फंड के कई नुकसान हैं।

अगर आप भी म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं या निवेश करने की सोच रहे हैं तो इन सभी म्यूचुअल फंड के नुकसान के बारे आप को ध्यान से पढ़ना चाहिए ताकि आप अपनी mutual fund investment का loss करने से बच सकें।

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चलिए अब एक-एक करके mutual fund के सभी disadvantages के बारे में जान लेते हैं, सबसे पहला नुकसान है–

1. म्यूचुअल फंड में मार्केट रिस्क का नुकसान

पहला नुकसान म्यूचुअल फंड के मार्केट रिस्क से जुड़ा हुआ है। ये तब होता है जब बाजार में बदलाव आते हैं और म्यूचुअल फंड की कीमत भी बदल जाती है। जैसे की अगर शेयर मार्केट में भारी गिरावट आ जाती है, तो म्यूचुअल फंड की कीमत भी गिर सकती है।

इसलिए, मार्केट रिस्क से बचने के लिए यह बहुत महत्त्वपूर्ण है कि निवेशक अपने निवेश पोर्टफोलियो में सही तरह से विविधता यानी diversification रखें, ताकि उन्हें एक ही निवेश के नुकसान से बचा जा सके।

इसके अलावा, मार्केट रिस्क से बचने के लिए लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग भी जरूरी है। जैसे कि, अगर निवेशक लम्बे समय तक अपने म्यूचुअल फंड में निवेश करता है, तो उसे short-term में बाजार के उतार-चढ़ाव से कम नुकसान उठना पड़ेगा।

एक उदाहरण के तौर पर, मान लीजिए कि एक निवेशक ने कुछ म्यूचुअल फंड में निवेश किया है और उसका NAV 100 रुपये है। अगर मार्केट में कोई बड़ी घटना होती है और मार्केट डाउन हो जाता है, तो म्यूचुअल फंड की कीमत भी गिर सकती है। ऐसे में, अगर म्यूचुअल फंड की कीमत 90 रुपये होती है, तो निवेशक को 10 रुपये का नुकसान उठाना पड़ेगा।

2. म्यूचुअल फंड निवेशकों को मैनेजमेंट पर निर्भर रहना पड़ता है

दूसरा म्यूचुअल फंड का नुकसान जो इसमें निवेश करने से जुड़ा हुआ है, वो है मैनेजमेंट रिस्क। इसका मतलब है कि म्यूचुअल फंड का प्रदर्शन बहुत अधिक उस फंड के प्रबंधन पर निर्भर करता है।

  • फंड के पोर्टफोलियो के चयन, निवेश रणनीति, स्टॉक चुनना और समग्र निर्णय लेने की प्रक्रिया में मैनेजर की खुद की विशेषज्ञता, अनुभव और ज्ञान का बहुत अधिक प्रभाव होता है।
  • अगर म्यूचुअल फंड के प्रबंधन में कोई समस्या होती है, जैसे कि कोई सीनियर मैनेजर इस्तीफा दे देता है या फिर कंपनी में आंतरिक विवाद हो जाता है, तो इससे म्युचुअल फंड के प्रदर्शन पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • इसके अलावा, कुछ म्यूचुअल फंड कंपनियां अपने प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लिए आक्रामक निवेश रणनीति का उपयोग करती हैं, जिससे आपका Risk बढ़ सकता है।

इसलिए, निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड के प्रबंधन टीम और उनके पिछले प्रदर्शन को अच्छी तरह से समझना जरूरी है। निवेशकों को कोशिश करनी चाहिए कि वो अपने म्यूचुअल फंड निवेश को नियमित रूप से निगरानी करें और मैनेजमेंट के निर्णय लेने की प्रक्रिया को बारीकी से देखें।

उदाहरण के लिए, अगर कोई म्यूचुअल फंड मैनेजर अपने निवेश निर्णयों में गलतियां कर देता है और पोर्टफोलियो का प्रदर्शन बुरा होता है, तो इससे म्यूचुअल फंड के निवेशकों को नुकसान हो सकता है।

इसलिए, एक अच्छे म्युचुअल फंड के लिए मैनेजमेंट टीम का अच्छा track record, expertise और investment style को समझना बहुत important है।

3. म्यूचुअल फंड में इंटरेस्ट रेट बदलने से नुकसान

तीसरा म्यूचुअल फंड का नुकसान है ब्याज दर जोखिम। ब्याज दर जोखिम तब होता है जब बाजार में ब्याज दर (Interest rate) में बदलाव आता है। ऐसे में म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले निवेशकों को जोखिम से समझौता करने की जरूरत होती है।

  • जब मार्केट में ब्याज दर बढ़ती है, तो बॉण्ड और डेट फंड की कीमत गिर जाती है और इससे म्यूचुअल फंड के निवेशकों को नुकसान हो सकता है।
  • ब्याज दर जोखिम से बचने के लिए, निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड को जोड़ना चाहिए, क्योंकि इक्विटी फंड की ब्याज दर में उतार-चढ़ाव होने के चांसेस कम होते हैं।

उदाहरण के तौर पर, अगर कोई निवेशक डेट फंड में निवेश करता है और ब्याज दर बढ़ जाती है, तो इससे म्यूचुअल फंड की कीमत गिर सकती है और निवेशक को नुकसान हो सकता है।

इसलिए, ब्याज दर के जोखिम से बचने के लिए निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में इक्विटी फंड को शामिल करना चाहिए, जिससे उन्हें बाजार के उतार-चढ़ाव से कम नुकसान हो।

4. म्यूचुअल फंड में क्रेडिट रिस्क का खतरा होता है

अगला बड़ा म्यूचुअल फंड का नुकसान है क्रेडिट रिस्क। क्रेडिट रिस्क का मतलब है कि कुछ म्यूचुअल फंड कंपनियों की credit-worthiness पूरी तरह से अच्छी नहीं होती है, जिसके कारण उनके फंड के निवेश में क्रेडिट रिस्क हो सकता है।

  • म्युचुअल फंड आमतौर पर corporate bond, Government securities और अन्य debt instruments में निवेश करते हैं।
  • अगर कोई कंपनी डिफॉल्ट कर देती है और उसकी बॉन्ड की वैल्यू कम हो जाती है, तो इसे म्यूचुअल फंड के इन्वेस्टर्स पर बुरा असर पड़ सकता है।
  • इसलिए, निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड निवेश को select करने से पहले फंड के holdings को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए।
  • निवेशकों को अच्छी क्रेडिट रेटिंग वाले कंपनियां और सरकारों के बॉन्ड और डेट इंस्ट्रूमेंट्स में निवेश करना चाहिए, जिससे क्रेडिट रिस्क कम हो।
  • इसके अलावा, म्यूचुअल फंड कंपनियों के पिछले प्रदर्शन का भी अच्छी तरह से वैल्यूएशन करना चाहिए, जिससे निवेशक को उनकी क्रेडिट के बारे में सही जानकारी मिल सके।

Example के लिए, अगर कोई म्यूचुअल फंड कंपनी अपने फंड के होल्डिंग्स में लो क्रेडिट रेटिंग वाली कंपनियों के बॉन्ड को जोड़ती है, तो इससे निवेशकों को क्रेडिट रिस्क का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए, निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड निवेश को चुनते समय फंड के होल्डिंग्स को अच्छी तरह से समझना चाहिए।

5. महंगाई बढ़ने के कारण म्यूचुअल फंड में नुकसान होता है

म्यूचुअल फंड में निवेश करने के बाद एक नुकसान यह हो सकता है कि अगर महंगाई बढ़ती है तो आपके निवेश की वैल्यू कम हो जाती है।

महंगाई यानी Inflation का मतलब होता है कि सामान की कीमत वक्त के साथ बढ़ती रहती है। अगर आपने एक म्यूचुअल फंड में निवेश किया है जिसका रिटर्न रेट 8% है, लेकिन उसी वक्त महंगाई का रेट 6% है, तो आपकी असल कमाई सिर्फ 2% ही होगी।

इसलिए, आपको म्यूचुअल फंड निवेश के रिटर्न के साथ-साथ inflation rate भी देखनी चाहिए और उसके बाद ही अपना फैसला लेना चाहिए।

उदाहरण के तौर पर,

  • मान लीजिए कि आपने 5 साल पहले 100000 रुपये एक म्यूचुअल फंड में निवेश किया था जिसका रिटर्न रेट 10% था।
  • लेकिन आज के समय में, अगर आपके इन्वेस्टमेंट की कीमत 5% बढ़ गई है, तो उस मामले में आपकी असली कमाई सिर्फ 5% ही है,
  • क्योंकि आपकी निवेश की वैल्यू तो 1,10,000 रुपये हो गई है लेकिन निवेश की कीमत से आपको उसकी असली कीमत का सिर्फ 95% तक ही फायदा हुआ है।
  • इसलिए, अगर आप म्यूचुअल फंड में निवेश करते हैं, तो आपको मार्केट परफॉर्मेंस के साथ-साथ महंगाई की भी जानकारी रखना बहुत जरूरी है।

6. म्यूचुअल फंड में लिक्विडिटी प्रॉब्लम होने के कारण नुकसान

अगला बड़ा म्यूच्यूअल फंड का नुकसान यह है कि कुछ म्यूचुअल फंड में लिक्विडिटी रिस्क हो सकता है, यानी आपके खरीदे गए यूनिट्स को बेचना मुश्किल हो सकता है।

  • लिक्विडिटी रिस्क तब होता है जब म्यूचुअल फंड में निवेश किया गया पैसा किसी कीमत से मुहैया ना हो और आप अपने यूनिट्स को बेचने की जरूरत हो।
  • जब आप अपने यूनिट को बेचने की कोशिश करते हैं, तब आपको पता चलता है कि फंड की लिक्विडिटी कम है और आपके यूनिट को बेचने में समस्या आ रही है।
  • इसके पीछे कुछ वजह हो सकती है, जैसे कि फंड के पोर्टफोलियो में निवेश किया गया स्टॉक या बॉन्ड के वैल्यू में गिरावट होना, या फिर उस फंड में बहुत से निवेशक अपनी यूनिट्स को बेचने की कोशिश कर रहे हैं।
  • ऐसे में, निवेशकों को अपने यूनिट को बेचने के लिए कुछ वक्त तक इंतजार करना पड़ सकता है, या फिर उन्हें अपने यूनिट को बेचने के लिए कम कीमत पर भी बेचना पड़ सकता है।

इसलिए, निवेशकों को म्युचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड की लिक्विडिटी के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए।

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7. म्यूचुअल फंड में कंसंट्रेशन रिस्क के कारण लॉस हो सकता है

म्यूच्यूअल फंड का सातवां नुकसान है एकाग्रता जोखिम. यह एक ऐसी स्थिति है, जहां किसी specific area या कंपनी में म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो का बहुत ज्यादा निवेश हो जाता है। ऐसा होने से, अगर वो सेक्टर या कंपनी परफॉर्म नहीं कर रही है, तो फंड की ओवरऑल परफॉर्मेंस पर बहुत बुरा असर पड़ सकता है।

एक उदाहरण के तौर पर,

  • मान लीजिए कि एक म्यूचुअल फंड कंपनी के पोर्टफोलियो में आईटी सेक्टर का 40% निवेश है।
  • अगर आईटी सेक्टर का overall performance डाउन हो जाता है तो फंड की परफॉर्मेंस भी अचानक से बहुत कम हो जाएगी,
  • क्योंकि उस फंड के पोर्टफोलियो में बहुत ज्यादा आईटी इंडस्ट्री के स्टॉक हैं।
  • ऐसे में, कंसंट्रेशन रिस्क की वजह से इन्वेस्टर्स के म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो की वैल्यू कम हो सकती है।

इसलिए, निवेशकों को कंसंट्रेशन रिस्क की वजह से भी म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो को समझना बहुत जरूरी है। इस प्रकार निवेशकों को अलग-अलग सेक्टरों में निवेश करना चाहिए ताकि कंसंट्रेशन रिस्क से बचा जा सके।

8. म्यूचुअल फंड कंपनी को रेगुलेटरी अथॉरिटी के अनुसार चलना पड़ता है

म्यूचुअल फंड का अगला नुकसान है Regulatory risk. इसका मतलब होता है कि म्यूचुअल फंड कंपनी को
Regulatory authorities के निर्देशों के मुताबिक काम करना होता है।

Regulatory Authorities जैसे की भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI), म्युचुअल फंड कंपनियों की निगरानी करती है और उनके अपने परिचालन में कुछ बदलाव करने के लिए कहती है। अगर म्यूचुअल फंड कंपनी रेगुलेटरी अथॉरिटीज के निर्देशों का पालन नहीं करती है, तो रेगुलेटरी रिस्क हो सकता है।

एक उदाहरण के तौर पर,

  • मान लीजिए कि सेबी ने अपने दिशा-निर्देशों में कहा है कि म्यूचुअल फंड कंपनी के पास कम से कम 20% पोर्टफोलियो में ही इक्विटी शेयर होने चाहिए।
  • लेकिन अगर म्यूचुअल फंड कंपनी रेग्युलेटरी अथॉरिटीज के गाइडलाइंस के मुताबिक काम नहीं करती है और कम से कम 20% इक्विटी शेयर की जगह 10% शेयर के साथ फंड चलती है, तो रेगुलेटरी अथॉरिटीज उस फंड कंपनी के खिलाफ कार्रवाई कर सकती है।
  • ऐसा होने से म्यूचुअल फंड कंपनी के निवेशकों को नुकसान भुगतना पड़ सकता है और नियामक जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

इसलिए, निवेशकों को म्यूचुअल फंड कंपनी के नियामकीय अनुपालन (Regulatory compliance) को भी जांचना चाहिए और नियामक जोखिम के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए, ताकि वो अपने निवेश के जोखिम को कम से कम कर सकें।

9. म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट में टैक्सेशन के कारण नुकसान

म्यूचुअल फंड निवेश से जुड़ी टैक्स इम्प्लीकेशन, टैक्सेशन रिस्क का कारण बन सकता है। जब निवेशक अपने म्यूचुअल फंड यूनिट को खरीदता है, तो उसके लिए कुछ टैक्स नियम लागू होते हैं।

जब आप अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को होल्ड करते हैं, तो उनकी वैल्यू बढ़ती है। जब आप उन्हें बेचते हैं, तो उस वैल्यू पर capital gains tax लगता है।

कैपिटल गेन टैक्स का रेट होल्डिंग पीरियड के आधार पर तय किया जाता है। अगर इनवेस्टर अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को 1 साल से कम समय के लिए होल्ड करता है, तो शॉर्ट टर्म कैपिटल गेन टैक्स लागू होता है,

और अगर उसके यूनिट्स को 1 साल से ज्यादा टाइम के लिए होल्ड किया है, तो लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स अप्लाई होती है।

उदाहरण के लिए,

  • मान लीजिए कि एक निवेशक ने अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को 2 साल के लिए होल्ड किया है और उसने उन्हें बेचा है। अब उसके कैपिटल गेन टैक्स का रेट 20% है।
  • लेकिन अगर वो यूनिट्स को 3 साल तक होल्ड करता है तो उसका capital gain tax रेट 10% होता है।

इसलिए, टैक्सेशन रिस्क को समझना बहुत important है, ताकि investors अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को होल्ड करने और बेचने के सही समय पर फायदे की उम्मीद रख सकें।

निवेशकों को अपने निवेश निर्णय लेने से पहले टैक्स नियम और विनियमों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए, ताकि वो अपने निवेश से जुड़े टैक्सेशन जोखिम से बच सकें।

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10. कभी-कभी म्यूच्यूअल फंड यूनिट को बेचना मुश्किल हो जाता है

अगला बड़ा म्यूच्यूअल फंड का नुकसान है रिडेम्पशन रिस्क. यह एक ऐसी स्थिति है, जहाँ म्यूचुअल फंड के यूनिट्स को बेचना मुश्किल हो जाता है। ये सिचुएशन तब तक रहती है जब तक की म्यूचुअल फंड कंपनी यूनिट्स को बेचने के लिए लिक्विडिटी प्रोवाइड नहीं कर पाती है।

  • मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड में बहुत सारे निवेशक हैं, जिन्होंने सभी यूनिट्स को एक साथ बेच दिया।
  • ऐसे में, फंड कंपनी को सभी निवेशकों को उनके शेयर के हिसाब से पैसे देने होते हैं।
  • लेकिन अगर फंड कंपनी के पास पर्याप्‍त कैश नहीं है, तो वह यूनिट बेचने के लिए पैसे provide नहीं कर पाती है इससे redemption risk हो सकता है।

एक उदाहरण के तौर पर,

  • मान लीजिए कि एक mutual fund कंपनी के पास बहुत ज्यादा रियल एस्टेट के यूनिट हैं और वो उन्हें बेचना चाहता है।
  • लेकिन रियल एस्टेट मार्केट में slowdown होने से म्यूचुअल फंड कंपनी उन यूनिट्स को बेच नहीं पाती है तो ऐसे में रिडेम्पशन रिस्क हो सकता है।

इसलिए, निवेशकों को म्युचुअल फंड के यूनिट्स बेचने से पहले रिडेम्पशन रिस्क के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए। निवेशकों को ये भी समझना चाहिए कि म्यूचुअल फंड कंपनी कितनी लिक्विड है और वो अपने इन्वेस्टर्स को उनके शेयर के हिसाब से पैसे देने के लिए सक्षम है या नहीं।

11. करेंसी में उतार-चढ़ाव म्यूचुअल फंड के नुकसान का कारण बन सकता है

करेंसी रिस्क म्यूचुअल फंड का अगला बड़ा नुकसान है. यह एक ऐसी स्थिति है, जहां म्यूचुअल फंड foreign assets में निवेश करने से जुड़ी करेंसी के उतार-चढ़ाव से प्रभावित हो सकता है।

अगर म्यूचुअल फंड कंपनी अपने पोर्टफोलियो में विदेशी निवेश को शामिल करता है, तो वो foreign currency में निवेश करता है। इसीलिए उसके रिटर्न्स currency exchange rates पर निर्भर करते हैं।

  • मान लीजिए कि एक म्यूचुअल फंड कंपनी US (अमेरिका) के स्टॉक मार्केट में निवेश करने का निर्णय लेते हैं और उसकी निवेश US doller में होती है।
  • अगर यूएस डॉलर की वैल्यू भारतीय रुपये के मुकाबले कम हो जाती है, तो म्यूचुअल फंड कंपनी के यूनिट्स के प्राइस में भी गिरावट आ सकती है।
  • इससे म्युचुअल फंड कंपनी और उनके निवेशकों को currency risk का सामना करना पड़ सकता है।

Example– मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड कंपनी ने जापानी येन currency में निवेश किया है। अगर जापानी येन की वैल्यू यूएस डॉलर के मुकाबले कम हो जाती है, तो म्यूचुअल फंड कंपनी के यूनिट्स के प्राइस में भी गिरावट आ सकती है। इसलिए, करेंसी रिस्क म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट से जुड़े निवेशकों के लिए बहुत जरूरी है।

इसलिए निवेशकों को ये भी समझना चाहिए कि उनके म्यूचुअल फंड निवेश के रिटर्न करेंसी एक्सचेंज रेट के आधार पर कैसे प्रभावित हो सकते हैं।

साथ ही निवेशकों को अपने निवेश के फैसले लेने से पहले विदेशी निवेश और मुद्रा विनिमय दरों के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए, ताकि वो अपने निवेश से जुड़े मुद्रा जोखिम से बच सकें।

12. म्यूचुअल फंड निवेश के अच्छा परफॉर्म ना करने से नुकसान

म्यूचुअल फंड का अगला नुकसान यह है कि म्यूचुअल फंड निवेश के प्रदर्शन में उतार-चढ़ाव और अनिश्चितता हो सकती है।

म्यूचुअल फंड निवेश के प्रदर्शन को कोई कारक जैसे कि मार्केट कंडीशन, economy, कंपनी का performance और फंड मैनेजर के फैसले प्रभावित करते हैं। इसलिए आपको म्यूचुअल फंड निवेश के प्रदर्शन के जोखिम का सामना करना पड़ सकता है।

मान लीजिये कि किसी म्यूचुअल फंड ने इक्विटी मार्केट में निवेश किया है और मार्केट कंडीशंस विपरीत हो गए हैं।

ऐसे में, म्यूचुअल फंड की यूनिट्स के प्राइस में भी गिरावट आ सकती है और परफॉर्मेंस रिस्क हो सकता है।

एक उदाहरण के तौर पर,

  • मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड के पास बहुत सारे डेट सिक्योरिटीज हैं और आर्थिक स्थितियां प्रतिकूल हो जाती हैं तो ऐसे में इस फंड के डेट सिक्योरिटीज की वैल्यू में भी गिरावट आ सकती है और म्यूचुअल फंड के परफॉर्मेंस में भी उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।
  • इसलिए, निवेशकों को म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन के जोखिम के बारे में भी जानकारी होनी चाहिए और आपको अपने निवेश निर्णय लेने से पहले फंड के प्रदर्शन के बारे में रिसर्च करना चाहिए।
  • इसके अलावा, निवेशकों को अपने risk tolerance और investment goals को भी समझना चाहिए, ताकि वो अपने इन्वेस्टमेंट पोर्टफोलियो को बैलेंस कर सकें और खराब परफॉर्मेंस के जोखिम से बच सकें।

13. म्यूचुअल फंड रिटर्न की वोलैटिलिटी का जोखिम बना रहता है

म्यूच्यूअल फंड का यह नुकसान बेंचमार्क रिस्क से जुड़ा हुआ है। यह एक ऐसी स्थिति है, जहां म्यूचुअल फंड के रिटर्न उसके बेंचमार्क के रिटर्न से कम या ज्यादा हो सकते हैं।

म्यूचुअल फंड के निवेश के प्रदर्शन को बेंचमार्क से तुलना किया जाता है। अगर म्यूचुअल फंड अपने बेंचमार्क के रिटर्न को पार नहीं कर पाता है, तो आपको नुकसान हो सकता है।

मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड का बेंचमार्क निफ्टी 50 है और म्यूचुअल फंड के रिटर्न निफ्टी 50 के रिटर्न से कम हैं। ऐसे में, निवेशकों को mutual fund की units के दाम में भी गिरावट का सामना करना पड़ सकता है जिससे आपके इन्वेस्टमेंट की वैल्यू कम हो सकती है।

उदाहरण के लिए,

  • मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड का बेंचमार्क S&P बीएसई सेंसेक्स है और म्यूचुअल फंड के रिटर्न उसके बेंचमार्क के रिटर्न से ज्यादा हैं तो इससे mutual fund के units के prices में भी वृद्धि हो सकती है।
  • लेकिन, अगर म्यूचुअल फंड अपने बेंचमार्क के रिटर्न को लगातार पार नहीं कर पाता है, तो आपको नुकसान हो सकता है।
  • इसलिए, निवेशकों को किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले फंड के बेंचमार्क के बारे में रिसर्च करना चाहिए और फंड के पिछले प्रदर्शन के तुलना में बेंचमार्क के रिटर्न पर भी विचार करना चाहिए।
  • निवेशकों को ये भी समझना चाहिए कि म्यूचुअल फंड के रिटर्न उसके बेंचमार्क के रिटर्न से कितना अलग हो सकते हैं और इससे उनके इन्वेस्टमेंट के रिटर्न्स पर कितना प्रभाव पड़ सकता है।

14. म्यूचुअल फंड के इन्वेस्टमेंट स्टाइल चेंज कर देने से रिटर्न कम हो सकते हैं

अगला मेरी म्यूचुअल फंड का नुकसान है स्टाइल रिस्क. इसमें म्यूचुअल फंड के निवेश स्टाइल में कोई अप्रत्याशित बदलाव हो जाता है और इससे फंड के रिटर्न और जोखिम प्रोफाइल में उतार-चढ़ाव हो सकते हैं।

म्युचुअल फंड के निवेश के तरीके को आम तौर पर उनके निवेश के उद्देश्य और निवेश की रणनीति के हिसाब से वर्गीकृत किया जाता है। इसलिए म्यूचुअल फंड के निवेश शैली में कोई परिवर्तन हो जाने से उस mutual fund के इन्वेस्टर्स का रिटर्न कम हो सकता है।

  • मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड का निवेश स्टाइल लार्ज-कैप स्टॉक में निवेश करना है, लेकिन अचानक से फंड मैनेजर स्मॉल-कैप स्टॉक में निवेश करना शुरू कर देता है।
  • ऐसे में, म्यूचुअल फंड के रिटर्न और रिस्क प्रोफाइल में काफी fluctuations यानी उतार चढ़ाव हो सकते हैं और इसका नुकसान म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने वाले लोगों को भुगतना पड़ सकता है।

एक उदाहरण के तौर पर,

मान लीजिए कि किसी म्यूचुअल फंड का निवेश स्टाइल डिविडेंड स्टॉक में निवेश करना है, लेकिन अचानक से फंड मैनेजर ग्रोथ स्टॉक में निवेश करना शुरू कर देता है तो ऐसे में उस फंड के अच्छा परफॉर्म ना करने के चांसेस बहुत ज्यादा बढ़ जाते हैं क्योंकि फंड मैनेजर की experties किसी और चीज में होती है।

इसलिए, निवेशकों को अपने निवेश के फैसले लेने से पहले फंड के निवेश की शैली यानी investment style और फंड मैनेजर के पिछले निवेश के फैसले के बारे में रिसर्च करना चाहिए।

ये जानने से निवेशक अपने जोखिम सहनशीलता और निवेश लक्ष्य के हिसाब से अपने निवेश पोर्टफोलियो को बैलेंस कर सकते हैं और निवेश स्टाइल जोखिम से बच सकते हैं।

15. पॉलिटिकल अस्थिरता के कारण म्यूचुअल फंड के नुक़सान

म्यूचुअल फंड के नुकसान में पॉलिटिकल स्थिरता बहुत बड़ा रोल प्ले करती है। राजनीतिक जोखिम म्यूचुअल फंड निवेश के लिए एक important factor है, जिसका कारण राजनीतिक घटनाएं और सरकार की नीतियों से संबंधित जोखिम होता है। ऐसी स्थितियों में, म्यूचुअल फंड निवेश के रिटर्न और Risk profile पर प्रभाव पड़ता है।

मान लीजिए कि किसी देश में चुनाव होते हैं और चुनाव परिणाम के बाद सरकार की नीतियों में बदलाव आते हैं।

ऐसे में, सरकार की नीतियों से संबंधित बदलाव से म्यूचुअल फंड के निवेश और उनके अंतर्निहित कंपनियों पर प्रभाव पड़ता है और इससे म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर भी प्रभाव पड़ सकता है।

इस तरह के राजनीतिक कार्यक्रम और नीतियां, म्यूचुअल फंड निवेश के लिए राजनीतिक जोखिम का कारण बन सकते हैं।

  • मान लीजिए कि किसी देश में कोई politiacal issue हो जैसे है, जैसे कि दंगे या नागरिक अशांति।
  • ऐसी स्थितियों में, म्यूचुअल फंड के निवेश और उनके अंतर्निहित कंपनियों पर बुरा प्रभाव पड़ता है और इससे म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर भी खराब असर पड़ सकता है।

इसलिए, निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले थोड़ा बहुत देश के राजनीतिक माहौल के बारे में भी रिसर्च करना चाहिए और ये जानने की कोशिश करनी चाहिए कि ऐसी स्थितियों में म्यूचुअल फंड के निवेश और उनके अंडरलाइंग कंपनियों पर किस तरह से असर पड़ सकता है।

निवेशकों को इस तरह की स्थितियों में म्यूचुअल फंड निवेश के लिए risk management strategies का उपयोग करना चाहिए और इस तरह के political risk से बचने के लिए अपने निवेश पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना चाहिए।

16. म्यूचुअल फंड में टाइमिंग रिस्क का खतरा बना रहता है

म्यूच्यूअल फंड इन्वेस्टमेंट में टाइमिंग रिक्स अगला बड़ा नुकसान है। अगर निवेशक म्यूचुअल फंड में निवेश करने का सही समय नहीं समझ पाता है, तो निवेश के रिटर्न पर प्रभाव पड़ता है।

मान लीजिए कि किसी कंपनी के शेयर को लेकर मार्केट में हाइप हो रहा है और इन्वेस्टर उस कंपनी के शेयर होल्ड करने वाले म्यूचुअल फंड में इन्वेस्टमेंट कर देता है।

अगर बाद में उस कंपनी की परफॉर्मेंस में गिरावट आती है, तो म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर भी बुरा असर पड़ता है इससे उस फंड में पैसा लगाने वाले इन्वेस्टर्स का नुकसान हो जाता है।

उदाहरण के लिए,

  • मान लीजिए कि निवेशक किसी म्यूचुअल फंड में निवेश करता है जब मार्केट already high है।
  • ऐसे में, अगर मार्केट बाद में नीचे जाता है, तो म्यूचुअल फंड कि निवेशकों को नुकसान हो सकता है और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि उन्होंने खराब टाइमिंग पर म्यूचुअल फंड में पैसा इन्वेस्ट किया था।
  • इसलिए, निवेशकों को अपने म्यूचुअल फंड में पैसा लगाने से पहले बाजार की स्थिति और अर्थव्यवस्था के बारे में रिसर्च करना चाहिए और ये जानने की कोशिश करनी चाहिए कि मार्केट अभी किस लेवल पर है और investment के लिए सही टाइम है या नहीं।

निवेशकों को इस तरह की स्थितियों में म्यूचुअल फंड निवेश के लिए जोखिम प्रबंधन रणनीतियों का उपयोग करना चाहिए और इस तरह के टाइमिंग जोखिम से बचने के लिए अपने निवेश पोर्टफोलियो को डायवर्सिफाई करना चाहिए।

जानिए– म्यूचुअल फंड में कितना रिटर्न मिलता है?

17. म्यूचुअल फंड की hidden fees के कारण निवेशकों को नुकसान

Hidden fees यानी छिपी हुई फीस जिसके बारे में म्यूच्यूअल फंड मैनेजर इन्वेस्टर्स को नहीं बताते हैं। इसे ‘unseen expenses’ या ‘unstated fees’ भी कहा जाता है जोकि म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए नुकसान की वजह बन सकता है।

  • ये फीस म्यूचुअल फंड कंपनी द्वारा इन्वेस्ट किए गए पैसे से deduct किए जाते हैं और इस तरह से investors को पता भी नहीं चलता है कि उनके investment से कितना पैसा deduct हो रहा है।
  • ये फीस मैनेजमेंट फीस, ट्रांजैक्शन फीस, रिडेम्पशन फीस, एडमिनिस्ट्रेटिव फीस, कस्टडी फीस, एडवाइजरी फीस या सेल्स चार्जेज के रूप में हो सकती है।
  • निवेशकों को इस तरह के हिडन फीस से बचने के लिए म्यूचुअल फंड कंपनी के ऑफर डॉक्यूमेंट और प्रॉस्पेक्टस को ध्यान से पढ़ना चाहिए, जिसमें सारे फीस का ब्रेक-अप मेंशन होता है।
  • साथ ही, किसी भी म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले निवेशकों को फीस और शुल्क की तुलना करना चाहिए और उन्हें उसके अन्य सभी options के बारे में पता होना चाहिए।
  • Hidden fees के अलावा, म्यूचुअल फंड में ‘Exit load’ भी एक हिडन फीस के रूप में हो सकता है। एग्जिट लोड, जिसे रिडेम्पशन चार्ज भी कहा जाता है।
  • यह एक पेनल्टी चार्ज है, जो तब लगता है जब investors अपने म्यूचुअल फंड यूनिट्स को बेचते हैं।
  • ये फीस म्यूचुअल फंड कंपनी के द्वारा लगाया जाता है, ताकि निवेशक अपनी यूनिट को जल्दी से बेचने की बजाए उन्हें थोड़ा और टाइम दे जिसमें वह म्यूचुअल फंड की परफॉर्मेंस को बेहतर कर सकें।
  • इसलिए, निवेशकों को एग्जिट लोड के बारे में भी पता होना चाहिए और उनका इसका प्रभाव भी समझना चाहिए।

18. म्यूचुअल फंड में डिविडेंड कम होने से नुकसान

डिविडेंड रिस्क म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट का एक रिस्क फैक्टर है इसमें म्यूचुअल फंड के डिविडेंड यील्ड कम हो जाने से इन्वेस्टर्स को नुकसान हो सकता है।

  • डिविडेंड यील्ड एक ऐसा प्रतिशत होता है, जो म्यूचुअल फंड में निवेश किए गए पैसे के हिसाब से कमाए गए डिविडेंड और फंड के करंट नेट एसेट वैल्यू (NAV) के बीच का रेशियो होता है।
  • डिविडेंड रिस्क का सामना करने के लिए investors को एक ऐसा म्यूचुअल फंड सेलेक्ट करना चाहिए जिसमें रेगुलर और लगातार dividend payout होता है।
  • अगर डिविडेंड यील्ड कम हो जाता है तो इन्वेस्टर को म्यूचुअल फंड से कम डिविडेंड इनकम मिलता है जो इन्वेस्टमेंट के लिए उम्मीद किया जा रहा था।
  • कुछ म्यूचुअल फंड कंपनियां रेगुलर डिविडेंड पे-आउट नहीं करती हैं, बल्कि डिविडेंड को जमा करके फंड के कैपिटल में re-invest करती हैं।
  • ऐसे फंड्स को ग्रोथ फंड्स कहा जाता है, जिनमे कैपिटल एप्रिसिएशन ज्यादा फोकस होती है डिविडेंड पे-आउट से।
  • निवेशकों को म्यूचुअल फंड के डिविडेंड रिस्क से बचने के लिए फंड के पिछले डिविडेंड यील्ड का विश्लेषण करना चाहिए और फंड के ऑफर डॉक्यूमेंट में उल्लेखित डिविडेंड पेआउट पॉलिसी को भी चेक करना चाहिए।
  • साथ ही, म्यूचुअल फंड के निवेश के लिए लॉन्ग-टर्म होरिजन बनाना भी डिविडेंड रिस्क से बचने का एक अच्छा तरीका है।

19. Mutual fund में डायवर्सिफिकेशन ना होने के कारण नुकसान

म्यूचुअल फंड का अगला नुकसान है भौगोलिक जोखिम जिसमें म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में एक ही देश या क्षेत्र के ज्‍यादा निवेश होने से निवेशक को नुकसान हो सकता है।

ये रिस्क फैक्टर बहुत सारे फैक्टर्स पर निर्भर करता है, जैसे कि देश के राजनीतिक हालात, आर्थिक विकास, मुद्रा में उतार-चढ़ाव, प्राकृतिक आपदाएं आदि।

  • अगर म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में एक ही देश या क्षेत्र का ज्यादा निवेश हो, तो किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना या economic outlook में बदलाव से म्यूचुअल फंड की परफॉर्मेंस पर सीधा असर पड़ सकता है।
  • जैसे, अगर म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में एक ही देश के ज्यादा स्टॉक्स हैं और उस देश में कोई बड़ा स्कैम हो जाता है, तो उसका impact म्यूचुअल फंड के परफॉर्मेंस पर भी पड़ेगा।

इस प्रकार के रिस्क से बचने के लिए, निवेशक को म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन की जरूरत होती है, जिससे एक ही देश या क्षेत्र का प्रदर्शन खराब होने से म्यूचुअल फंड पर इतना प्रभाव नहीं पड़ेगा।

डायवर्सिफिकेशन से पोर्टफोलियो रिस्क कम होता है और लॉन्ग टर्म इनवेस्टमेंट होरिजन होने से म्यूचुअल फंड के परफॉर्मेंस पर ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ता है।

साथ ही, निवेशकों को म्यूचुअल फंड निवेश से पहले ऑफर डॉक्यूमेंट में दिए गए geographic allocation को भी चेक करना चाहिए, ताकि उन्हें पता चले कि म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में कितनी भौगोलिक विविधता है।

20. म्यूचुअल फंड पोर्टफोलियो में सेक्टर रिस्क से नुकसान

म्यूचुअल फंड के नुकसान का आखिरी पॉइंट है सेक्टर रिस्क. यह म्यूचुअल फंड इन्वेस्टमेंट का रिस्क फैक्टर है, जिसमें म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में एक ही सेक्टर का ज्यादा investment होने से निवेशकों को loss हो सकता है।

Sector risk भी बहुत सारे अन्य factors पर निर्भर करता है, जैसे कि सेक्टर के प्रदर्शन, सरकारी नियम, competitive landscape, आदि।

  • अगर म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में एक ही सेक्टर के ज्यादा स्टॉक्स हैं और उस सेक्टर की परफॉर्मेंस में किसी भी वजह से गिरावट होती है, तो म्यूचुअल फंड की परफॉर्मेंस पर सीधा असर पड़ सकता है।
  • जैसे, अगर म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में बैंकिंग सेक्टर का ज्यादा स्टॉक है और बैंक स्टॉक की परफॉर्मेंस में गिरावट आती है, तो उसका असर म्यूचुअल फंड के परफॉर्मेंस पर भी बुरा असर पड़ेगा।
  • सेक्टर जोखिम से बचने के लिए, निवेशकों को म्युचुअल फंड के पोर्टफोलियो में डायवर्सिफिकेशन की जरूरत होती है, जिससे एक ही सेक्टर का प्रदर्शन बिगड़ने से म्यूचुअल फंड के रिटर्न पर ज्यादा प्रभाव ना पड़े।

इसीलिए निवेशकों को म्यूचुअल फंड में निवेश करने से पहले उनके ऑफर डॉक्यूमेंट में यह देख लेना चाहिए कि सेक्टर एलोकेशन को कहां कहां पर है ताकि उन्हें यह पता चले कि म्यूचुअल फंड के पोर्टफोलियो में कितनी सेक्टर में डायवर्सिफिकेशन है।

इस तरह के पोर्टफोलियो में सेक्टर डायवर्सिफिकेशन, म्यूचुअल फंड के नुकसान को कम करने के लिए एक जरूरी फैक्टर है।

FAQ’s (Mutual fund ke nuksan in hindi)

क्या म्यूचुअल फंड में पैसा डूब सकता है?

अगर आप बिना रिसर्च किए किसी non-performing म्यूचुअल फंड में पैसा निवेश कर देते हैं तो उसमें आपका पैसा डूब सकता है इसीलिए म्यूचुअल फंड में पैसा इन्वेस्ट करने से पहले अच्छे से रिसर्च कर लें।

क्या म्यूचुअल फंड एक सुरक्षित निवेश है?

म्यूचुअल फंड निवेश मार्केट-लिंक्ड होती है, इसलिए इसमें आपकी इन्वेस्टमेंट कम होने का थोड़ा बहुत व्यस्त बना रहता है और इसीलिए इसे पूरी तरह से सुरक्षित नहीं कहा जा सकता. मतलब म्यूचुअल फंड में निवेश के लिए जोखिम तो होता है लेकिन यह शेयर बाजार में डायरेक्ट निवेश से कम जोखिम वाला होता है।

म्यूचुअल फंड के नुकसान से कैसे बचा जा सकता है?

म्यूचुअल फंड के नुकसान से बचने के लिए इन्वेस्टर को पहले सभी नुकसान को समझना चाहिए और उसके बाद ही इन्वेस्टमेंट करना चाहिए। साथ ही, पोर्टफोलियो को डाइवर्सिफाई करना चाहिए और लॉन्ग टर्म इन्वेस्टमेंट की प्लानिंग करनी चाहिए।

म्यूचुअल फंड खराब क्यों होते हैं?

म्यूचुअल फंड में शेयर मार्केट की अपेक्षा कम रिटर्न मिलते हैं इसीलिए कुछ म्यूच्यूअल फंड खराब होते हैं क्योंकि उसी पैसे को अच्छी कंपनियों के शेयर में इन्वेस्ट करके आप अच्छा खासा रिटर्न कमा सकते हैं।

म्यूचुअल फंड में हिडन फीस क्या होता है?

म्यूचुअल फंड में कुछ छिपा शुल्क भी हो सकता है, जिससे  निवेशकों को नुकसान हो सकता है। ये फीस आमतौर पर एक्सपेंस रेश्यो के रूप में होती है। एक्सपेंस रेशियो म्यूचुअल फंड के मैनेजमेंट और ऑपरेटिंग एक्सपेंस को कवर करता है।

क्या म्यूचुअल फंड के साथ टैक्सेशन रिस्क भी होता है?

हां, म्यूचुअल फंड निवेश के लिए टैक्स इम्प्लीकेशन भी होता है, जो टैक्सेशन रिस्क का कारण बन सकता है। म्यूचुअल फंड में शॉर्ट टर्म और लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन टैक्स लगता है।

म्यूचुअल फंड निवेश का न्यूनतम राशि कितना होता है?

म्यूचुअल फंड निवेश का न्यूनतम राशि अलग-अलग फंड हाउस में अलग-अलग होता है। आम तौर पर, न्यूनतम निवेश राशि रु. 500-1000 होता है, लेकिन कुछ फंड हाउस में न्यूनतम निवेश राशि 5000 रुपये तक हो सकती है।

भारत में म्यूचुअल फंड की समस्याएं क्या हैं?

भारत में म्यूचुअल फंड की कई समस्याएं होती हैं जैसे; टैक्सेशन चार्ज, hidden fees जो आपके इन्वेस्टमेंट पर बुरा असर डालती हैं।

क्या म्यूचुअल फंड में जोखिम होता है?

जी हां म्यूचुअल फंड में जोखिम जरूर होता है लेकिन अगर आपने म्यूचुअल फंड चुनते समय अपने पोर्टफोलियो का अलग-अलग सेक्टर्स में डायवर्सिफाई किया और अच्छी ग्रोथ फंड को सिलेक्ट किया तो आप अपने जोखिम को कम कर सकते हैं।

म्यूचुअल फंड के नुकसान – ‘निष्कर्ष’

आज के पोस्ट में हमने जाना कि म्यूचुअल फंड के नुकसान क्या-क्या होते हैं और उन सभी नुकसान जैसे; Timing risk, Regulatory risk, hidden fees, dividend risk, currency risk आदि के बारे में हमने विस्तार से चर्चा की।

अंत में मैं बस आपसे इतना ही कहना चाहूंगा कि आपको फाइनेंसियल प्लानिंग करते समय या किसी mutual fund में इन्वेस्टमेंट करते समय म्यूचुअल फंड के नुकसान को ध्यान में जरूर रखना चाहिए।

मैं आशा करता हूं इस आर्टिकल में दी गई जानकारी (disadavantages of mutual fund in hindi) हर निवेशक के लिए उपयोगी साबित होगी। इस टॉपिक पर आपका क्या कहना है नीचे कमेंट करके जरूर बताइए

और अगर आपका mutual fund से संबंधित कोई सवाल है तो वह भी कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं।

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मेरा नाम दीपक सेन है और मैं इस वेबसाइट का Founder हूं। यहां पर मैं अपने पाठकों के लिए नियमित रूप से शेयर मार्केट, निवेश और फाइनेंस से संबंधित उपयोगी जानकारी शेयर करता हूं। ❤️