Option Buying vs Option Selling in Hindi: ऑप्शन बाइंग करना चाहिए या सेलिंग?

Option buying vs option selling in hindi, ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में क्या अंतर है, ऑप्शन बाइंग करना चाहिए या ऑप्शन सेलिंग दोनों में क्या ज्यादा बेहतर है, Option buying vs option selling which is best, Difference between option buyer vs option seller in hindi

आज मैं आपको बताऊंगा कि ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में क्या अंतर है, आपको ऑप्शन बाइंग करनी चाहिए या फिर ऑप्शन सेलिंग? Option buying और option selling दोनों के फायदे और नुकसान क्या हैं, इसके बारे में आज हम विस्तार से बात करने वाले हैं.

अगर आप option buying vs option selling के बारे में सब कुछ विस्तार से जानना चाहते हैं तो इस पोस्ट को अंत तक जरूर पढ़ना.

इस पोस्ट में आप जानेंगे-

Option Buying vs Option Selling in Hindi

Option buying vs option selling in hindi

ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में अंतर यह है कि option buying आपको स्ट्राइक प्राइस पर कोई call या put ऑप्शन को खरीदने का अधिकार देता है जबकि option selling आपको ऑप्शंस को बेचने का अधिकर देता है। मतलब ऑप्शन बायर ऑप्शंस को खरीदता है जबकि ऑप्शन सेलर ऑप्शन्स को बेचता है।

Option Buying और Option Selling दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। लेकिन आपको बता दें कि एक डेटा के अनुसार इंडिया में 95% option buyer ऑप्शन ट्रेडिंग में पैसा गंवाते हैं और केवल 5% ऑप्शन बायर्स ही में पैसा कमाते हैं।

ठीक इसके विपरीत, 95% option sellers ऑप्शन ट्रेडिंग में पैसा कमाते हैं और केवल 5% ऑप्शन बायर्स को ही ऑप्शन ट्रेडिंग में नुकसान होता है।

लेकिन फिर भी 80% लोग option buying करते हैं और बचे हुए सिर्फ 20% ट्रेडर्स ही option selling करते हैं।

मतलब option buying में नुकसान के बावजूद भी अधिकतर लोग सिर्फ ऑप्शन बाइंग ही करते हैं ना कि ऑप्शन सेलिंग. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि ऑप्शन बाइंग को आप कम पैसे से शुरू कर सकते हैं

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जबकि ऑप्शन सेलिंग करने के लिए आपको लाखों रुपए की जरूरत पड़ती है. इसीलिए Option writing यानी ऑप्शन सेलिंग ज्यादातर प्रोफेशनल ट्रेडर्स ही करते हैं और यही कारण है कि इंडिया में 80% लोग ऑप्शन सेलिंग की तुलना में ऑप्शन बाइंग करना ज्यादा पसंद करते हैं।

ऑप्शन खरीदना बेहतर है या बेचना – Option buying vs option selling which is best?

अब सवाल आता है कि ऑप्शन खरीदना बेहतर है या बेचना. मतलब ऑप्शन बाइंग करना चाहिए या ऑप्शन सेलिंग? इसका जवाब है कि अगर आप कम समय में अधिक रिटर्न कमाना चाहते हैं तो आपको option buying करना चाहिए. लेकिन अगर आपके पास ज्यादा पैसा है तो option selling आपके लिए बेस्ट है।

अगर आपके पास ऑप्शन ट्रेडिंग करने के लिए बहुत कम पूंजी है तो आप option buying से शुरुआत कर सकते हैं। फिर जब आपका प्रॉफिट बढ़ने लगे और अच्छा खासा कैपिटल जमा हो जाए तो option selling करना शुरू कर सकते हैं।

ऑप्शन बाइंग करना चाहिए या ऑप्शन सेलिंग?

अधिकतर ऑप्शन ट्रेडर अपनी शुरुआत option buying से ही करते हैं क्योंकि इसमें बहुत कम पैसों की जरूरत पड़ती है. फिर धीरे-धीरे जब उन्हें ऑप्शन ट्रेडिंग का थोड़ा बहुत अनुभव हो जाता है तो वह ऑप्शन सेलिंग करना शुरू कर देते हैं।

लेकिन यह पूरी तरह से आपके ऊपर निर्भर करता है कि–

  • आप कितना रिस्क लेना चाहते हैं,
  • आपके पास ट्रेडिंग के लिए कितना पैसा है,
  • ऑप्शन ट्रेडिंग में आपका कितना अनुभव है,
  • आपको ऑप्शन खरीदने से प्रॉफिट हो रहा है या ऑप्शन बेचने से,
  • Option buying vs option selling में से क्या आपको ज्यादा आसान लगता है,
  • कौन-कौन सी ऑप्शन ट्रेडिंग स्ट्रेटेजीस आपके लिए प्रॉफिटेबल रही हैं,
  • ऑप्शन खरीददार या ऑप्शन विक्रेता दोनों में से आप क्या बनना चाहते हैं?

ऊपर दिए गए इन्हीं सारे points पर विचार करते हुए आपको यह तय होगा कि आपको ऑप्शन बाइंग करना है ऑप्शन सेलिंग.

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ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में से क्या अच्छा है?

ऑप्शन ट्रेडिंग में जो beginners हैं उनके लिए ऑप्शन बाइंग अच्छा है क्योंकि option buying में आप बहुत कम पैसों से शुरुआत कर सकते हैं। लेकिन अगर आपको ऑप्शन ट्रेडिंग का थोड़ा बहुत अनुभव हो चुका है तो आपके लिए ऑप्शन सेलिंग करना बेस्ट है।

अगर हम option buying की बात करें, तो जब आप ऑप्शन्स को खरीदते हैं तो आपको केवल उसके ‘प्रीमियम’ के पैसे देने पड़ते हैं जिसकी बहुत कम होती है।

उदाहरण के लिए– अगर अभी रिलायंस का शेयर प्राइस 2500 रुपये है और आपको लगता है कि एक हफ्ते से पहले यह 2600 तक पंहुच जाएगा. तो इस समय आप रिलायंस का कॉल ऑप्शन खरीद सकते हैं जिसकी कीमत सिर्फ 40 या 50 रुपये होगी।

अब मान लो अगर 1 हफ्ते से पहले शेयर 2600 रुपये तक नहीं पहुंचता तो ऐसे में आपको 40 रुपये का loss होगा.

मतलब आपने प्रीमियम के लिए जितना पैसा दिया था उतना आपको नुकसान उठाना पड़ेगा।

लेकिन अगर मान लो 1 हफ्ते से पहले रिलायंस का शेयर प्राइस 2600 रुपये तक चला जाता है तो आपको प्रॉफिट होगा।

अब अगर option selling की बात करें, तो ऊपर दिए गए उदाहरण में पहली स्थिति में जब रिलायंस का शेयर प्राइस नहीं बढ़ता है तो ऑप्शन सेलर को 40 रुपये का प्रॉफिट होता है जबकि दूसरी स्थिति में शेयर प्राइस बढ़ने पर ऑप्शन सेलर को नुकसान होगा।

Option Buyer vs Option Seller in Hindi

ऊपर दिए गए उदाहरण में, अगर हम option buyer की बात करें तो उसका नुकसान केवल वही है जितना उसने प्रीमियम का भुगतान किया है। मतलब जो पैसा उसने प्रीमियम के लिए दिया है केवल उतना ही मैक्सिमम नुकसान उसे हो सकता है जबकि प्रॉफिट अनलिमिटेड हो सकता है।

क्योंकि अगर रिलायंस का शेयर प्राइस अगर अचानक से बहुत ज्यादा बढ़ जाएगा तो option buyer के द्वारा खरीदे गए कॉल ऑप्शन प्रीमियम की कीमत अचानक से बहुत ज्यादा बढ़ जाएगी.

और ऐसे में प्रीमियम की कीमत जितनी ज्यादा बढेगी उतना ही ज्यादा ऑप्शन सेलर को नुकसान होगा।

लेकिन मान लो अगर रिलायंस का शेयर प्राइस बढ़ने के बजाय अचानक से बहुत ज्यादा घट जाता है तो ऐसे में option buyer का maximum loss 40 रुपये ही होगा.

कहने का मतलब यह है कि option buyer के प्रॉफिट होने के चांसेस अनलिमिटेड है और नुकसान केवल प्रीमियम का प्राइस है जबकि option seller को असीमित नुकसान हो सकता है अगर शेयर प्राइस बहुत ही ज्यादा ऊपर चला जाए.

लेकिन आपको बता दूं कि फिर भी option seller ही अधिकतर पैसा कमाता है। इसका कारण यह है कि किसी भी स्टॉक इंडेक्स के शेयर प्राइस का इतना तेजी से ऊपर जाने या नीचे गिरने की संभावना बहुत ही कम होती है और इसी का फायदा option seller को मिलता है।

  • मान लो अगर कोई स्टॉक XYZ एक ही रेंज में घूम रहा है मतलब ना तो उसका शेयर प्राइस ऊपर जा रहा है और ना ही नीचे.
  • वह XYZ स्टॉक एक ही शेयर प्राइस के आसपास मार्केट में लंबे समय से ट्रेड कर रहा है तो ऐसे में उस स्टॉक का call या put ऑप्शन खरीदने वाले को नुकसान होगा जबकि बेचने वाले को प्रॉफिट होगा।
  • ऐसा इसलिए होगा क्योंकि ऑप्शन्स में time value की वजह से समय बीतने के साथ-साथ ऑप्शंस प्रीमियम की कीमत भी कम होती जाती है जिसका फायदा option seller को होता है।

आपको बता दें कि एक ऑप्शन सेलर किसी ऑप्शन बायर से ज्यादा बार पैसा इसलिए कमाता है क्योंकि option seller अधिक पैसा इन्वेस्ट करके कम रिटर्न की उम्मीद करता है जबकि option buyer कम पैसा लगाकर अधिक रिटर्न की उम्मीद करता है।

प्रत्येक ऑप्शन सेलर जानता है कि उसने जो ऑप्शन बेचा है उसके प्रीमियम की कीमत बढ़ने के चांसेस बहुत कम है. और ऑप्शन बायर उस ऑप्शन को सिर्फ इसलिए खरीदता है क्योंकि उसके प्रीमियम की कीमत बहुत कम है।

और यही कारण है कि शेयर मार्केट में ऑप्शन ट्रेडिंग करने वाले 95% option sellers को प्रॉफिट होता है और option buyers को नुकसान होता है। जबकि बचे हुए सिर्फ 5% option buyers ही ऑप्शन ट्रेडिंग में पैसा कमाते हैं और इतने ही लोग option writing में पैसा गंवाते हैं।

क्या ऑप्शन सेलिंग करना ऑप्शन बाइंग करने से अच्छा है?

Why option selling is better than option buying: अब आप भी सोच रहे होंगे कि क्या ऑप्शन सेलिंग करना ऑप्शन बाइंग करने से अच्छा है? तो इसका जवाब है कि यह आपके रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करता है। अगर आपको ऑप्शन ट्रेडिंग के basics ही नहीं पता तो पहले आपको इसकी बेसिक चीजों को सीखने की कोशिश करना चाहिए जैसे–

जब आपको option trading के basics क्लियर हो जाए तो उसके बाद आपको यह सोचना चाहिए कि अब आपको ऑप्शन बाइंग करना है या ऑप्शन सेलिंग. क्योंकि जब तक आपको ऑप्शन ट्रेडिंग के बेसिक फंडामेंटल ही पता नहीं होंगे तब तक आप ना तो ऑप्शन बाइंग ठीक से कर पाएंगे और ना ही ऑप्शन राइटिंग।

उम्मीद करता हूं अब आप समझ गए होंगे कि ऑप्शन खरीदने और बेचने दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं।

और अगर आप एक beginner हैं तो आप अपने option buying शुरुआत कर सकते हैं फिर धीरे-धीरे आप option selling की ओर बढ़ सकते हैं।

लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि आप शुरुआत में ऑप्शन सेलिंग नहीं कर सकते, इसका निर्णय लेने का हक पूरी तरह से आपके ऊपर है कि आपको option selling vs option buying में से किसे चुनना है.

और यह आपके ऊपर निर्भर करता है कि आप की knowledge, experience और रिस्क कैपेसिटी क्या है और उसी के हिसाब से आपको यह तय करना होगा कि option buying या option writing में से क्या आपके लिए ज्यादा बेहतर है।

कॉल और पुट ऑप्शन्स को खरीदना चाहिए या बेचना चाहिए (Buying options vs Selling options in hindi)

When should I buy or sell options in hindi: कॉल और पुट ऑप्शंस को खरीदना या बेचना मार्केट कंडीशन के ऊपर निर्भर करता है।

अगर आप एक ऑप्शन बायर हैं और आपको लगता है कि मार्केट ऊपर जाएगा तो आपको कॉल ऑप्शन खरीदना चाहिए और अगर आपको लगता है कि मार्केट नीचे जाएगा तो आपको पुट ऑप्शन खरीदना चाहिए।

लेकिन अगर आप एक ऑप्शन सेलर हैं और आपको लगता है कि मार्केट ऊपर जाएगा तो आपको पुट ऑप्शन बेचना चाहिए और अगर आपको लगता है कि मार्केट नीचे जाएगा तो आपको कॉल ऑप्शन बेचना चाहिए।

मतलब option buying में मार्केट बढ़ने पर call ऑप्शन buy करना चाहिए और option selling में मार्केट बढ़ने पर put ऑप्शन sell करना चाहिए.

इसी तरह मार्केट गिरने पर option buying में put option खरीदना चाहिए और option selling में call option बेचना चाहिए।

अब कुछ लोग सोच रहे होंगे कि एक ही मार्केट कंडीशन में ऑप्शंस को खरीदना बेहतर है या बेचना, क्या ज्यादा प्रॉफिटेबल है? चलिए अब इसी के बारे में जान लेते हैं–

Selling call option vs buying put option in hindi

कॉल ऑप्शन को बेचना या पुट ऑप्शन को खरीदना यह दोनों ही काम आप तब करते हैं जब आपको मार्केट गिरने की उम्मीद होती है. लेकिन इन दोनों में अंतर क्या है और किस में ज्यादा फायदा है call option को sell करने में या put option को buy करने में.

आपको बता दें कि call option को sell करने में आपको ज्यादा पैसों की जरूरत पड़ेगी जबकि put option को buy करने में कम पैसों की जरूरत होगी.

लेकिन जब आप put खरीदने की बजाए call बेचते हैं तो आपके प्रॉफिट कमाने के चांसेस काफी बढ़ जाते हैं ऐसा इसलिए होता है क्योंकि बाजार में अधिकतर ऑप्शन बायर छोटे से प्रीमियम के बदले आपके द्वारा बेचे गए ऑप्शन को खरीद लेते हैं जिस पर उनका कंफर्मेशन बहुत हाई नहीं होता है क्योंकि प्रीमियम की कीमत बहुत ही कम होती है।

इसलिए अगर उनका पूरा प्रीमियम का पैसा डूब भी जाता है तो भी उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ेगा यही कारण है कि Selling call option बेहतर है buying put option की तुलना में।

लेकिन मैं यह नहीं कह रहा हूं कि आपको केवल ऑप्शन सेलिंग करनी चाहिए और ऑप्शन बाइंग नहीं करना चाहिए. बल्कि मैं केवल इतना कह रहा हूं कि आपको दोनों के फायदे व नुकसान को पहले समझना चाहिए और फिर डिसाइड करना चाहिए कि आपको क्या करना है।

Buying call option vs selling put option in hindi

कॉल ऑप्शन को खरीदना या पुट ऑप्शन को बेचना यह दोनों ही काम आप तब करते हैं जब आपको मार्केट ऊपर जाने की उम्मीद होती है. लेकिन इन दोनों में अंतर क्या है और किस में ज्यादा फायदा है call option को buy करने में या put option को sell करने में.

आपको बता दूं कि दोनों के अपने-अपने फायदे और नुकसान हैं। जब आप कॉल ऑप्शन खरीदते हैं तो आप कम पैसा लगाते हैं और जब आप पुट ऑप्शन बेचते हैं तो आप ज्यादा पैसा लगाते हैं।

जिस वक्त आप अधिक पैसा लगाते हैं उस समय आपके जीतने की संभावना बढ़ जाती है यानी selling put option में आपके पैसा कमाने के चांस अधिक होते हैं Buying call option की तुलना में।

FAQ’s (Option Buying vs Option Selling in Hindi)

ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में से क्या ज्यादा प्रॉफिटेबल है?

ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में से ऑप्शन सेलिंग ज्यादा प्रॉफिटेबल है क्योंकि ऑप्शंस बेचने में मुनाफा कमाने की संभावना बहुत ज्यादा होती है जबकि ऑप्शंस बेचने में नुकसान होने के चांसेस बढ़ जाते हैं। लेकिन अगर आप ऑप्शन बाइंग में सही रणनीति के द्वारा ट्रेडिंग करते हैं तो इसमें अपने आप अच्छा खासा प्रॉफिट कमा सकते हैं।

ऑप्शन सेलिंग कैसे ज्यादा प्रॉफिटेबल है?

ऑप्शन सेलिंग में स्टॉक के उस दिशा में जाने से तो आपको प्रॉफिट होता ही है जिस दिशा में आपने दाव लगाया है. लेकिन ऑप्शन विक्रेता को तब भी प्रॉफिट होता है जब स्टॉक ना तो ऊपर जाता है और ना ही नीचे. मतलब जब शेयर की कीमत बढ़ती या घटती नहीं है तो ऑप्शन सेलिंग में प्रॉफिट होता है।

ऑप्शन बायर और ऑप्शन सेलर में से कौन ज्यादा पैसा कमाता है?

ऑप्शन बायर और ऑप्शन सेलर में से कौन ज्यादा पैसा कमाता है, यह कई फैक्टर्स पर निर्भर करता है जैसे; मार्केट कंडीशन, स्ट्राइक प्राइस, प्रीमियम राशि और ऑप्शन की expiry तिथि. सामान्यतः लॉन्ग टर्म में ऑप्शन सेलर ऑप्शन बायर से अधिक पैसा कमाता है क्योंकि उन्हें ऑप्शन बेचने पर प्रीमियम मिलता है और जब ऑप्शन एक्सपायर होता है तो यही प्रीमियम उनका प्रॉफिट होता है।

क्या ऑप्शन बायर्स पैसा कमाते हैं?

जी हां, ऑप्शन बायर्स उस समय अधिक पैसा कमाते हैं जब मार्केट में वोलैटिलिटी उनके फेवर में काम करती है। अगर शेयर बाजार में कोई अनचाहा इवेंट होता है तो मार्केट में बहुत तेजी से उतार-चढ़ाव होता है जिससे ऑप्शन सेलर को नुकसान हो सकता है लेकिन ऐसी स्थिति में option buyers पैसा कमाते हैं।

निष्कर्ष – ‘ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में क्या अंतर है’

मैं उम्मीद करता हूं इस पोस्ट को पढ़ने के बाद अब आप समझ गए होंगे कि ऑप्शन बाइंग और ऑप्शन सेलिंग में क्या अंतर है, आपको ऑप्शन बाइंग करनी चाहिए या फिर ऑप्शन सेलिंग, ऑप्शन खरीदना बेहतर है या ऑप्शन बेचना.

इस आर्टिकल में हमने आपको option writing और option buying के difference को बिल्कुल आसान भाषा में समझाने की कोशिश की है। उम्मीद करता हूं आपको यह जानकारी ‘option buying vs option selling in hindi’ उपयोगी लगी होगी।

अब आप नीचे कमेंट करके बताइए कि आप ऑप्शन खरीदार है या ऑप्शन विक्रेता और दोनों में से आप के लिए क्या ज्यादा प्रॉफिटेबल रहा है? मुझे आपके कमेंट का इंतजार रहेगा. पूरा पोस्ट पढ़ने के लिए आपका बहुत-बहुत धन्यवाद।

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