Simple Trading Book हिंदी PDF Download – [4.3 MB]

Simple trading book hindi for beginners (शेयर बाजार में सफलता की कुंजी: शेयर ट्रेडिंग गाइड)– यह सिंपल ट्रेडिंग बुक आपको शेयर मार्केट और स्टॉक ट्रेडिंग के बारे में हिंदी भाषा में सीखने में मदद करेगी। यह किताब शुरुआती लोगों के लिए लिखी गई है जिसमें शेयर बाजार में निवेश से लेकर रिस्क मैनेजमेंट और ट्रेडिंग साइकोलॉजी तक सब कुछ आसान भाषा में सिखाया गया है।

Simple trading book in hindi

क्या आप शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं, लेकिन शुरुआत करने से डरते हैं?

ट्रेडिंग सीखने के लिए बिगिनर्स के लिए यह बुक काफी बढ़िया है जो आपको शेयर बाजार की मूल बातें सिखाएगी और आपको एक सफल ट्रेडर बनने के लिए आवश्यक सभी रणनीतियाँ प्रदान करेगी।

इस पुस्तक में आप जानेंगे:

  • शेयर बाजार की कार्यप्रणाली
  • शेयरों का चुनाव कैसे करें
  • विभिन्न ट्रेडिंग रणनीतियाँ
  • जोखिम प्रबंधन और अनुशासन
  • और भी बहुत कुछ!

यह पुस्तक शुरुआती लोगों के लिए लिखी गई है, इसलिए आपको शेयर बाजार का कोई पूर्व ज्ञान होने की जरूरत नहीं है।

आज ही यह Simple trading book हिंदी में डाउनलोड करें और शेयर बाजार में सफलता की अपनी यात्रा शुरू करें!

इस पोस्ट में आप जानेंगे-

Simple Trading Book PDF Details in Hindi

Book NameSimple Trading Book
LanguageHindi
FormatPDF
Pages69
Ratings4.9/5
AuthorDeepak Sen
Total Chapter15
Book Size4.3MB
Download LinkGiven Below

Simple Trading Book All Chapters in Hindi

भाग 1: शेयर बाजार की मूल बातें

  • अध्याय 1: शेयर बाजार क्या है?
    • शेयर बाजार का परिचय
    • शेयर बाजार के विभिन्न प्रकार
    • शेयर बाजार में भाग लेने वाले
  • अध्याय 2: शेयरों में निवेश क्यों करें?
    • शेयरों में निवेश के लाभ
    • शेयरों में निवेश के जोखिम
  • अध्याय 3: शेयर बाजार की कार्यप्रणाली
    • शेयरों की खरीद और बिक्री
    • शेयरों की कीमतें कैसे निर्धारित होती हैं
    • शेयर बाजार के विभिन्न सूचकांक
  • अध्याय 4: शेयरों का चुनाव कैसे करें?
    • मौलिक विश्लेषण
    • तकनीकी विश्लेषण
    • विभिन्न प्रकार के शेयरों का चयन
  • अध्याय 5: डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलना
    • डीमैट खाता क्या है?
    • ट्रेडिंग खाता क्या है?
    • डीमैट और ट्रेडिंग खाता कैसे खोलें?

भाग 2: शेयर ट्रेडिंग की रणनीतियाँ

  • अध्याय 6: स्विंग ट्रेडिंग
    • स्विंग ट्रेडिंग क्या है?
    • स्विंग ट्रेडिंग रणनीतियाँ
  • अध्याय 7: डे ट्रेडिंग
    • डे ट्रेडिंग क्या है?
    • डे ट्रेडिंग रणनीतियाँ
  • अध्याय 8: पोजीशनल ट्रेडिंग
    • पोजीशनल ट्रेडिंग क्या है?
    • पोजीशनल ट्रेडिंग रणनीतियाँ
  • अध्याय 9: ऑप्शन ट्रेडिंग
    • ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है?
    • ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीतियाँ
  • अध्याय 10: डेरिवेटिव ट्रेडिंग
    • डेरिवेटिव ट्रेडिंग क्या है?
    • डेरिवेटिव ट्रेडिंग रणनीतियाँ

भाग 3: जोखिम प्रबंधन और अनुशासन

  • अध्याय 11: जोखिम प्रबंधन
    • शेयर बाजार में जोखिम
    • जोखिम प्रबंधन रणनीतियाँ
  • अध्याय 12: अनुशासन
    • शेयर बाजार में अनुशासन का महत्व
    • अनुशासित ट्रेडिंग रणनीतियाँ

भाग 4: अतिरिक्त जानकारी

  • अध्याय 13: शेयर बाजार से संबंधित शब्दावली
  • अध्याय 14: शेयर बाजार के बारे में पुस्तकें और संसाधन
  • अध्याय 15: शेयर बाजार में सफल होने के लिए टिप्स

चलिए एक-एक करके इस trading book के सभी चैप्टर्स के बारे में संक्षिप्त में जान लेते हैं–

अध्याय 1: शेयर बाजार क्या है?

शेयर बाजार एक ऐसा बाजार है जहां कंपनियों के शेयर खरीदे और बेचे जाते हैं। यह एक ऐसा मंच है जो कंपनियों को पूंजी जुटाने और निवेशकों को कंपनियों में हिस्सेदारी खरीदने और बेचने का अवसर प्रदान करता है।

शेयर बाजार के विभिन्न प्रकार:

  • प्राथमिक बाजार: यह वह बाजार है जहां कंपनियां पहली बार अपने शेयर जनता को जारी करती हैं।
  • द्वितीयक बाजार: यह यहां पर पहले से जारी किए गए शेयरों का व्यापार होता है।
  • अंतर्राष्ट्रीय शेयर बाजार: जहां विभिन्न देशों की कंपनियों के शेयरों का व्यापार होता है।

शेयर बाजार में भाग लेने वाले:

  • कंपनियां: वे कंपनियां जो पूंजी जुटाने के लिए शेयर जारी करती हैं।
  • निवेशक: वे व्यक्ति जो कंपनियों के शेयर खरीदते और बेचते हैं।
  • ब्रोकर: वे व्यक्ति या संस्थाएं जो निवेशकों की ओर से शेयरों का व्यापार करते हैं।
  • स्टॉक एक्सचेंज: वे संगठन जो शेयरों के व्यापार के लिए एक मंच प्रदान करते हैं।

उदाहरण:

  • मान लीजिए कि आप एक कंपनी शुरू करना चाहते हैं और आपको अपनी कंपनी के लिए पूंजी जुटाने की आवश्यकता है तो आप प्राथमिक बाजार में जाकर अपने कंपनी के शेयर जनता को जारी कर सकते हैं।
  • मान लीजिए कि आप एक निवेशक हैं तो आप किसी कंपनी के शेयर खरीद सकते हैं और उन शेयरों की कीमत बढ़ने पर उन्हें बेचकर लाभ कमा सकते हैं।
  • अगर आप एक ब्रोकर हैं तो आप निवेशकों की ओर से शेयरों का व्यापार करते हैं और इसके लिए शुल्क लेते हैं।
  • स्टॉक एक्सचेंज वह प्लेटफॉर्म होते हैं जो शेयरों की ट्रेडिंग के लिए एक मंच प्रदान करते हैं और इसके लिए शुल्क लेते हैं।

अध्याय 2: शेयरों में निवेश क्यों करें?

शेयरों में निवेश के लाभ:

  • धन का निर्माण: शेयरों में निवेश करने से आप लंबी अवधि में अपनी पूंजी को बढ़ा सकते हैं। शेयर बाजार ने ऐतिहासिक रूप से अन्य निवेश विकल्पों जैसे कि बचत खाते या फिक्स्ड डिपॉजिट की तुलना में अधिक रिटर्न दिया है।
  • नियमित आय: कुछ कंपनियां अपने शेयरधारकों को लाभांश का भुगतान करती हैं, जो नियमित आय का स्रोत हो सकता है।
  • मालिकाना हक: जब आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो आप उस कंपनी में स्वामित्व का हिस्सा खरीदते हैं।
  • विविधता: शेयरों में निवेश करके आप अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता ला सकते हैं, जो आपके जोखिम को कम करने में मदद कर सकता है।
  • तरलता: शेयरों को आसानी से खरीदा और बेचा जा सकता है, जिससे आपको अपनी पूंजी तक आसानी से पहुंच मिलती है।

उदाहरण:

  • यदि आप ₹10,000 रुपये किसी कंपनी के शेयरों में निवेश करते हैं और कंपनी 10% प्रति वर्ष की दर से बढ़ती है, तो आपके निवेश का मूल्य 10 वर्षों में ₹25,937 हो जाएगा।
  • यदि आप किसी ऐसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं जो लाभांश का भुगतान करती है, तो आप हर साल कंपनी के मुनाफे का हिस्सा प्राप्त कर सकते हैं।
  • यदि आप विभिन्न क्षेत्रों और उद्योगों में कंपनियों के शेयर खरीदते हैं, तो आप अपने निवेश पोर्टफोलियो में विविधता ला सकते हैं और अपने जोखिम को कम कर सकते हैं।

शेयरों में निवेश के जोखिम:

  • बाजार में उतार-चढ़ाव: शेयर बाजार में उतार-चढ़ाव होता रहता है, और आपके शेयरों का मूल्य किसी भी समय गिर सकता है।
  • कंपनी का प्रदर्शन: यदि आप जिस कंपनी में निवेश करते हैं, वह अच्छा प्रदर्शन नहीं करती है, तो आपके शेयरों का मूल्य गिर सकता है।
  • आर्थिक स्थिति: आर्थिक स्थिति में बदलाव शेयर बाजार को प्रभावित कर सकता है और आपके शेयरों का मूल्य गिर सकता है।
  • तरलता जोखिम: कुछ शेयरों को खरीदना और बेचना मुश्किल हो सकता है, खासकर जब बाजार में अस्थिरता हो।

उदाहरण:

  • यदि आप किसी कंपनी के शेयर खरीदते हैं और कंपनी का मुनाफा कम हो जाता है, तो आपके शेयरों का मूल्य गिर सकता है।
  • यदि अर्थव्यवस्था में मंदी आती है, तो शेयर बाजार गिर सकता है और आपके शेयरों का मूल्य गिर सकता है।
  • यदि आप किसी छोटी कंपनी के शेयर खरीदते हैं, तो आपको उन्हें खरीदने और बेचने में मुश्किल हो सकती है।

अध्याय 3: शेयर बाजार की कार्यप्रणाली

शेयरों की खरीद और बिक्री

शेयरों की खरीद और बिक्री स्टॉक एक्सचेंज के माध्यम से होती है। भारत में, दो प्रमुख स्टॉक एक्सचेंज हैं: बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई)।

शेयरों की खरीद-बिक्री के लिए निम्नलिखित चरणों का पालन करना होता है:

  1. डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलें: डीमैट खाता शेयरों को इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखने के लिए होता है। ट्रेडिंग खाता शेयरों की खरीद और बिक्री के लिए होता है।
  2. ब्रोकर का चयन करें: ब्रोकर एक मध्यस्थ होता है जो शेयरों की खरीद और बिक्री में आपकी सहायता करता है।
  3. ऑर्डर दें: आप अपने ब्रोकर को ऑर्डर दे सकते हैं कि आप किस शेयर को किस कीमत पर खरीदना या बेचना चाहते हैं।
  4. ऑर्डर का निष्पादन: जब आपके ऑर्डर की कीमत शेयर बाजार में मिल जाती है, तो ऑर्डर का निष्पादन हो जाता है।

उदाहरण:

मान लीजिए कि आप XYZ कंपनी के 100 शेयर खरीदना चाहते हैं। आप अपने ब्रोकर को ₹100 प्रति शेयर के भाव पर खरीदने का ऑर्डर देते हैं। जब XYZ कंपनी के शेयर की कीमत ₹100 प्रति शेयर हो जाती है, तो आपका ऑर्डर निष्पादित हो जाता है और आपको 100 शेयर मिल जाते हैं।

शेयरों की कीमतें कैसे निर्धारित होती हैं

शेयरों की कीमतें मांग और आपूर्ति के आधार पर निर्धारित होती हैं। जब किसी शेयर की मांग अधिक होती है और आपूर्ति कम होती है, तो शेयर की कीमत बढ़ जाती है। इसके विपरीत, जब किसी शेयर की मांग कम होती है और आपूर्ति अधिक होती है, तो शेयर की कीमत गिर जाती है।

शेयरों की कीमतों को प्रभावित करने वाले कुछ कारक:

  • कंपनी का प्रदर्शन
  • कंपनी के बारे में खबरें
  • बाजार की धारणा
  • आर्थिक स्थिति
  • राजनीतिक स्थिति

उदाहरण:

मान लीजिए कि XYZ कंपनी ने अच्छे तिमाही परिणाम घोषित किए हैं। इससे XYZ कंपनी के शेयर की मांग बढ़ जाएगी और शेयर की कीमत बढ़ जाएगी।

शेयर बाजार के विभिन्न सूचकांक

शेयर बाजार के प्रदर्शन को मापने के लिए विभिन्न सूचकांकों का उपयोग किया जाता है। कुछ प्रमुख सूचकांक हैं:

  1. निफ्टी 50: यह भारत के 50 सबसे बड़े और सबसे अधिक तरल कंपनियों का सूचकांक है।
  2. सेंसेक्स: यह भारत के 30 सबसे बड़े और सबसे अधिक तरल कंपनियों का सूचकांक है।
  3. बैंक निफ्टी: यह भारत के 12 सबसे बड़े बैंकों का सूचकांक है।

उदाहरण:

मान लीजिए कि निफ्टी 50 सूचकांक 1% बढ़ गया है। इसका मतलब है कि निफ्टी 50 में शामिल 50 कंपनियों के शेयरों की कीमतें औसतन 1% बढ़ी हैं।

यह अध्याय आपको शेयर बाजार की कार्यप्रणाली की बुनियादी समझ प्रदान करता है।

अध्याय 4: शेयरों का चुनाव कैसे करें?

शेयरों का चुनाव शेयर बाजार में निवेश करने का सबसे महत्वपूर्ण पहलू है। सही शेयर चुनने से आपको अपने निवेश पर अच्छा रिटर्न मिल सकता है, जबकि गलत शेयर चुनने से आपको पैसे का नुकसान हो सकता है।

शेयरों का चुनाव करने के दो मुख्य तरीके हैं:

1. मौलिक विश्लेषण

मौलिक विश्लेषण एक कंपनी के वित्तीय स्वास्थ्य और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करने पर केंद्रित है। इसमें निम्नलिखित कारकों का विश्लेषण शामिल है:

  • राजस्व और लाभ: कंपनी का राजस्व और लाभ बढ़ रहा है या घट रहा है?
  • ऋण: कंपनी पर कितना ऋण है?
  • मार्जिन: कंपनी का लाभ मार्जिन क्या है?
  • प्रबंधन: कंपनी का प्रबंधन कैसा है?
  • प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति: कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति कैसी है?

उदाहरण:

मान लीजिए कि आप XYZ कंपनी के शेयरों में निवेश करने पर विचार कर रहे हैं। आप मौलिक विश्लेषण करते हैं और पाते हैं कि कंपनी का राजस्व और लाभ पिछले कुछ वर्षों से लगातार बढ़ रहा है। कंपनी पर बहुत कम ऋण है और इसका लाभ मार्जिन बहुत अच्छा है। कंपनी का प्रबंधन अनुभवी और योग्य है। कंपनी की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत है।

इस विश्लेषण के आधार पर, आप यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि XYZ कंपनी एक अच्छा निवेश हो सकता है।

2. तकनीकी विश्लेषण

तकनीकी विश्लेषण शेयरों की कीमतों के ऐतिहासिक डेटा का अध्ययन करके भविष्य की कीमतों की भविष्यवाणी करने पर केंद्रित है। इसमें विभिन्न प्रकार के चार्ट और संकेतकों का उपयोग शामिल है।

उदाहरण:

मान लीजिए कि आप ABC कंपनी के शेयरों की कीमतों का विश्लेषण कर रहे हैं। आप तकनीकी विश्लेषण करते हैं और पाते हैं कि शेयर की कीमत एक अपट्रेंड में है। शेयर की कीमत ने हाल ही में एक महत्वपूर्ण प्रतिरोध स्तर को पार किया है। शेयर के लिए सापेक्ष शक्ति सूचकांक (RSI) 70 से ऊपर है, जो ओवरबॉट स्थिति का संकेत देता है।

इस विश्लेषण के आधार पर, आप यह निष्कर्ष निकाल सकते हैं कि ABC कंपनी के शेयरों की कीमत में आगे बढ़ने की संभावना है।

विभिन्न प्रकार के शेयरों का चयन

विभिन्न प्रकार के शेयर उपलब्ध हैं, जिनमें शामिल हैं:

  • ब्लू-चिप शेयर: ये बड़ी, स्थापित कंपनियां हैं जो लगातार लाभांश का भुगतान करती हैं।
  • विकास शेयर: ये छोटी, तेजी से बढ़ती कंपनियां हैं जिनमें उच्च विकास क्षमता है।
  • मूल्य शेयर: ये ऐसे शेयर हैं जिनका मूल्यांकन उनके वास्तविक मूल्य से कम है।
  • आय शेयर: ये ऐसे शेयर हैं जो उच्च लाभांश का भुगतान करते हैं।

आपको अपने निवेश लक्ष्यों और जोखिम सहनशीलता के आधार पर विभिन्न प्रकार के शेयरों का चयन करना चाहिए।

निष्कर्ष

शेयरों का चुनाव एक जटिल प्रक्रिया हो सकती है। आपको विभिन्न कारकों पर विचार करने की आवश्यकता है, जैसे कि कंपनी का वित्तीय स्वास्थ्य, शेयर की कीमत का इतिहास, और आपके निवेश लक्ष्य।

यह महत्वपूर्ण है कि आप अपना खुद का शोध करें और किसी भी निवेश निर्णय लेने से पहले किसी वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

अध्याय 5: डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलना

डीमैट खाता क्या है?

डीमैट खाता एक इलेक्ट्रॉनिक खाता है जो आपके शेयरों, बॉन्ड, और अन्य प्रतिभूतियों को भौतिक प्रमाणपत्रों के बजाय इलेक्ट्रॉनिक रूप में रखता है। यह खाता एक डिपॉजिटरी पार्टिसिपेंट (डीपी) द्वारा संचालित होता है जो भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा पंजीकृत होता है।

डीमैट खाते के लाभ:

  • भौतिक प्रमाणपत्रों के खोने या चोरी होने का खतरा नहीं होता है।
  • प्रतिभूतियों का लेनदेन आसान और तेज़ होता है।
  • आप अपने खाते को ऑनलाइन देख सकते हैं और प्रबंधित कर सकते हैं।

ट्रेडिंग खाता क्या है?

ट्रेडिंग खाता एक खाता है जो आपको शेयर बाजार में शेयर खरीदने और बेचने की अनुमति देता है। यह खाता एक स्टॉकब्रोकर द्वारा संचालित होता है जो सेबी द्वारा पंजीकृत होता है।

ट्रेडिंग खाते के लाभ:

  • आप शेयर बाजार में आसानी से निवेश कर सकते हैं।
  • आप विभिन्न प्रकार के ऑर्डर दे सकते हैं।
  • आप अपने खाते को ऑनलाइन देख सकते हैं और प्रबंधित कर सकते हैं।

डीमैट और ट्रेडिंग खाता कैसे खोलें?

डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलने के लिए आपको निम्नलिखित चरणों का पालन करना होगा:

  1. एक स्टॉकब्रोकर चुनें।
  2. खाता खोलने का फॉर्म भरें और आवश्यक दस्तावेज जमा करें।
  3. ब्रोकर द्वारा आपके आवेदन का सत्यापन किया जाएगा।
  4. आपके खाते को सक्रिय किया जाएगा।

आवश्यक दस्तावेज:

  • पहचान प्रमाण (आधार कार्ड, पैन कार्ड, मतदाता पहचान पत्र)
  • पते का प्रमाण (बिजली बिल, टेलीफोन बिल, बैंक स्टेटमेंट)
  • बैंक खाते का विवरण

उदाहरण:

मान लीजिए आप XYZ स्टॉकब्रोकर के साथ डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलना चाहते हैं। आप XYZ स्टॉकब्रोकर की वेबसाइट पर जाकर खाता खोलने का फॉर्म डाउनलोड कर सकते हैं। आपको फॉर्म में अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंक खाते का विवरण और आवश्यक दस्तावेजों की प्रतियां जमा करनी होंगी। XYZ स्टॉकब्रोकर आपके आवेदन का सत्यापन करेगा और आपके खाते को सक्रिय करेगा।

अतिरिक्त जानकारी:

  • डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोलने के लिए आपको शुल्क का भुगतान करना होगा।
  • आप एक ही स्टॉकब्रोकर के साथ डीमैट और ट्रेडिंग खाता खोल सकते हैं या अलग-अलग स्टॉकब्रोकर के साथ अलग-अलग खाते खोल सकते हैं।
  • आप अपने डीमैट खाते को किसी भी बैंक खाते से जोड़ सकते हैं।

यह अध्याय आपको डीमैट और ट्रेडिंग खाते के बारे में आवश्यक जानकारी प्रदान करता है। आप इस जानकारी का उपयोग करके अपने लिए उपयुक्त खाता चुन सकते हैं।

अध्याय 6: स्विंग ट्रेडिंग

स्विंग ट्रेडिंग क्या है?

स्विंग ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जिसमें कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों तक की अवधि के लिए शेयरों को खरीदना और बेचना शामिल है। इसका लक्ष्य अल्पकालिक मूल्य में उतार-चढ़ाव का लाभ उठाकर मुनाफा कमाना है। स्विंग ट्रेडर्स तकनीकी विश्लेषण और मौलिक विश्लेषण दोनों का उपयोग करके ट्रेडिंग के लिए शेयरों का चयन करते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग रणनीतियाँ:

  • चैनल ट्रेडिंग: यह रणनीति उच्च और निम्न मूल्य स्तरों के बीच स्थापित चैनलों की पहचान करने पर आधारित है। ट्रेडर्स चैनल के ऊपरी भाग पर खरीदते हैं और चैनल के निचले भाग पर बेचते हैं।
  • मूविंग एवरेज ट्रेडिंग: यह रणनीति शेयर की कीमत की गति का विश्लेषण करने के लिए मूविंग एवरेज का उपयोग करती है। ट्रेडर्स जब शेयर की कीमत मूविंग एवरेज से ऊपर जाती है तो खरीदते हैं और जब शेयर की कीमत मूविंग एवरेज से नीचे जाती है तो बेचते हैं।
  • सापेक्ष शक्ति सूचकांक (आरएसआई): यह रणनीति यह निर्धारित करने के लिए आरएसआई का उपयोग करती है कि शेयर ओवरबॉट है या ओवरसोल्ड है। ट्रेडर्स जब शेयर ओवरसोल्ड होता है तो खरीदते हैं और जब शेयर ओवरबॉट होता है तो बेचते हैं।
  • समर्थन और प्रतिरोध स्तर: यह रणनीति उन स्तरों की पहचान करने पर आधारित है जहां शेयर की कीमत उछाल या गिर सकती है। ट्रेडर्स समर्थन स्तरों पर खरीदते हैं और प्रतिरोध स्तरों पर बेचते हैं।

उदाहरण:

मान लीजिए कि आप XYZ कंपनी के शेयरों में रुचि रखते हैं। आप तकनीकी विश्लेषण का उपयोग करके शेयरों का विश्लेषण करते हैं और पाते हैं कि शेयर एक चैनल में ट्रेडिंग कर रहे हैं। चैनल का उच्चतम स्तर ₹100 और निम्नतम स्तर ₹80 है। आप ₹90 पर शेयर खरीदने का निर्णय लेते हैं और ₹100 पर बेचने का निर्णय लेते हैं।

स्विंग ट्रेडिंग के लाभ:

  • यह आपको अल्पकालिक मूल्य में उतार-चढ़ाव से लाभ उठाने की अनुमति देता है।
  • यह आपको लंबी अवधि के निवेश की तुलना में अधिक तरलता प्रदान करता है।
  • यह आपको अपने जोखिम को सीमित करने की अनुमति देता है।

स्विंग ट्रेडिंग के जोखिम:

  • यह अत्यधिक अस्थिर हो सकता है।
  • यह समय लेने वाला हो सकता है।
  • इसमें उच्च नुकसान की क्षमता होती है।

Disclaimer: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह के रूप में नहीं लिया जाना चाहिए।

अध्याय 7: डे ट्रेडिंग

डे ट्रेडिंग क्या है?

डे ट्रेडिंग एक ऐसी रणनीति है जिसमें एक ही दिन में शेयरों को खरीदना और बेचना शामिल होता है। डे ट्रेडर्स शेयरों की कीमतों में अल्पकालिक उतार-चढ़ाव का लाभ उठाने का प्रयास करते हैं।

डे ट्रेडिंग के लाभ:

  • संभावित रूप से उच्च रिटर्न: डे ट्रेडिंग में अल्पकालिक लाभ कमाने की क्षमता होती है।
  • लचीलापन: डे ट्रेडर्स अपनी ट्रेडिंग गतिविधियों को अपने समय के अनुसार समायोजित कर सकते हैं।
  • नियंत्रण: डे ट्रेडर्स अपनी ट्रेडिंग रणनीतियों पर पूर्ण नियंत्रण रखते हैं।

डे ट्रेडिंग के जोखिम:

  • उच्च जोखिम: डे ट्रेडिंग में उच्च जोखिम शामिल होता है, क्योंकि शेयरों की कीमतें अत्यधिक अस्थिर हो सकती हैं।
  • तनाव: डे ट्रेडिंग एक तनावपूर्ण गतिविधि हो सकती है, क्योंकि इसमें लगातार बाजार की निगरानी और त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता होती है।
  • समय की प्रतिबद्धता: डे ट्रेडिंग में समय की प्रतिबद्धता शामिल होती है, क्योंकि आपको बाजार के खुले रहने के दौरान सक्रिय रूप से व्यापार करना होगा।

डे ट्रेडिंग रणनीतियाँ:

  • स्केलपिंग: स्केलपिंग एक ऐसी रणनीति है जिसमें बहुत कम समय अंतराल में शेयरों को खरीदना और बेचना शामिल होता है।
  • डे ट्रेडिंग रेंज: यह रणनीति उन शेयरों की पहचान करने पर केंद्रित है जो एक निश्चित मूल्य सीमा के भीतर व्यापार करते हैं।
  • मूविंग एवरेज क्रॉसओवर: यह रणनीति मूविंग एवरेज का उपयोग करके खरीदने और बेचने के संकेतों की पहचान करती है।
  • सपोर्ट और रेजिस्टेंस: यह रणनीति उन शेयरों की पहचान करती है जो महत्वपूर्ण समर्थन और प्रतिरोध स्तरों के पास व्यापार कर रहे हैं।

उदाहरण:

  • स्केलपिंग: यदि आप ₹100 पर XYZ कंपनी का शेयर खरीदते हैं और इसे ₹101 पर बेचते हैं, तो आपने ₹1 का लाभ कमाया है।
  • डे ट्रेडिंग रेंज: यदि ABC कंपनी का शेयर ₹100 और ₹110 के बीच व्यापार कर रहा है, तो आप ₹100 पर खरीद सकते हैं और ₹110 पर बेच सकते हैं।
  • मूविंग एवरेज क्रॉसओवर: यदि 50-दिवसीय मूविंग एवरेज 200-दिवसीय मूविंग एवरेज को ऊपर से पार करता है, तो यह एक खरीद संकेत हो सकता है।
  • सपोर्ट और रेजिस्टेंस: यदि DEF कंपनी का शेयर ₹100 के समर्थन स्तर के पास व्यापार कर रहा है, तो आप ₹100 पर खरीद सकते हैं और उम्मीद कर सकते हैं कि शेयर की कीमत बढ़ेगी।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि डे ट्रेडिंग सभी के लिए नहीं है। यदि आप उच्च जोखिम लेने के लिए तैयार नहीं हैं, तो डे ट्रेडिंग आपके लिए उपयुक्त नहीं हो सकती है।

अध्याय 8: पोजीशनल ट्रेडिंग

पोजीशनल ट्रेडिंग क्या है?

पोजीशनल ट्रेडिंग एक प्रकार की ट्रेडिंग रणनीति है जिसमें ट्रेडर कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों या महीनों तक के लिए शेयरों की स्थिति धारण करते हैं। यह रणनीति उन लोगों के लिए उपयुक्त है जो अल्पकालिक मूल्य उतार-चढ़ाव से लाभ उठाना चाहते हैं, लेकिन लंबी अवधि के लिए निवेश करने में रुचि नहीं रखते हैं।

पोजीशनल ट्रेडिंग रणनीतियाँ:

  • प्रवृत्ति अनुसरण: यह रणनीति उन शेयरों की पहचान करने पर केंद्रित है जो एक मजबूत प्रवृत्ति में हैं। ट्रेडर तब प्रवृत्ति की दिशा में स्थिति लेते हैं।
  • समर्थन और प्रतिरोध स्तर: यह रणनीति उन शेयरों की पहचान करने पर केंद्रित है जो महत्वपूर्ण समर्थन या प्रतिरोध स्तरों के पास पहुंच रहे हैं। ट्रेडर तब इन स्तरों पर उछाल या गिरावट का अनुमान लगाने के लिए स्थिति लेते हैं।
  • तकनीकी संकेतक: यह रणनीति तकनीकी संकेतकों का उपयोग करके शेयरों की खरीद और बिक्री के लिए संकेतों की पहचान करने पर केंद्रित है।

उदाहरण:

  • प्रवृत्ति अनुसरण: मान लीजिए कि XYZ कंपनी का शेयर पिछले कुछ महीनों से लगातार बढ़ रहा है। एक पोजीशनल ट्रेडर इस शेयर को खरीदने का निर्णय ले सकता है और तब तक स्थिति धारण कर सकता है जब तक कि प्रवृत्ति जारी रहती है।
  • समर्थन और प्रतिरोध स्तर: मान लीजिए कि ABC कंपनी का शेयर ₹100 के समर्थन स्तर के पास पहुंच रहा है। एक पोजीशनल ट्रेडर इस शेयर को खरीदने का निर्णय ले सकता है और यह अनुमान लगा सकता है कि यह स्तर शेयर की कीमत को गिरने से रोकेगा।
  • तकनीकी संकेतक: मान लीजिए कि DEF कंपनी का शेयर RSI (Relative Strength Index) संकेतक के अनुसार ओवरबॉट क्षेत्र में प्रवेश कर रहा है। एक पोजीशनल ट्रेडर इस शेयर को बेचने का निर्णय ले सकता है और यह अनुमान लगा सकता है कि शेयर की कीमत गिरने वाली है।

ध्यान दें:

  • पोजीशनल ट्रेडिंग में जोखिम शामिल है। ट्रेडिंग करने से पहले अपनी जोखिम सहनशीलता का मूल्यांकन करना महत्वपूर्ण है।
  • पोजीशनल ट्रेडिंग में सफल होने के लिए, आपको शेयर बाजार की अच्छी समझ और अनुशासन की आवश्यकता है।

यह अध्याय आपको पोजीशनल ट्रेडिंग की मूल बातें समझने में मदद करेगा।

अध्याय 9: ऑप्शन ट्रेडिंग

ऑप्शन ट्रेडिंग क्या है?

ऑप्शन ट्रेडिंग एक प्रकार का अनुबंध है जो एक खरीदार को एक निश्चित मूल्य पर एक निश्चित तिथि या उससे पहले एक अंतर्निहित परिसंपत्ति खरीदने या बेचने का अधिकार देता है, लेकिन दायित्व नहीं। विक्रेता, जिसे विकल्प लेखक भी कहा जाता है, खरीदार को यह अधिकार प्रदान करता है और बदले में प्रीमियम प्राप्त करता है।

ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीतियाँ:

  • कवर्ड कॉल:
    • यह रणनीति उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो अपने शेयरों को धारण करना चाहते हैं लेकिन प्रीमियम भी अर्जित करना चाहते हैं।
    • इस रणनीति में, निवेशक अपने शेयरों के समान संख्या में कॉल विकल्प बेचता है।
    • यदि शेयर की कीमत बढ़ती है, तो निवेशक को शेयरों की बिक्री से लाभ होगा, लेकिन उसे कॉल विकल्प खरीदारों को भी शेयरों को बेचना होगा।
    • यदि शेयर की कीमत गिरती है, तो निवेशक को कॉल विकल्प प्रीमियम मिलेगा, लेकिन उसे शेयरों के मूल्य में गिरावट का भी नुकसान होगा।
  • कॉल स्प्रेड:
    • यह रणनीति उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो शेयर की कीमत में तेजी की उम्मीद करते हैं।
    • इस रणनीति में, निवेशक दो कॉल विकल्प खरीदता है, एक कम स्ट्राइक मूल्य और दूसरा उच्च स्ट्राइक मूल्य के साथ।
    • यदि शेयर की कीमत बढ़ती है, तो दोनों विकल्पों का मूल्य बढ़ेगा, लेकिन उच्च स्ट्राइक मूल्य वाले विकल्प का मूल्य कम स्ट्राइक मूल्य वाले विकल्प की तुलना में अधिक बढ़ेगा।
    • इस रणनीति का लाभ यह है कि यह सीमित जोखिम के साथ असीमित लाभ की क्षमता प्रदान करता है।
  • पुट स्प्रेड:
    • यह रणनीति उन निवेशकों के लिए उपयोगी है जो शेयर की कीमत में गिरावट की उम्मीद करते हैं।
    • इस रणनीति में, निवेशक दो पुट विकल्प खरीदता है, एक कम स्ट्राइक मूल्य और दूसरा उच्च स्ट्राइक मूल्य के साथ।
    • यदि शेयर की कीमत गिरती है, तो दोनों विकल्पों का मूल्य बढ़ेगा, लेकिन उच्च स्ट्राइक मूल्य वाले विकल्प का मूल्य कम स्ट्राइक मूल्य वाले विकल्प की तुलना में अधिक बढ़ेगा।
    • इस रणनीति का लाभ यह है कि यह सीमित जोखिम के साथ असीमित लाभ की क्षमता प्रदान करता है।

उदाहरण:

मान लीजिए कि XYZ कंपनी का शेयर ₹100 पर कारोबार कर रहा है। एक निवेशक ₹110 स्ट्राइक मूल्य पर एक कॉल विकल्प खरीदता है और ₹120 स्ट्राइक मूल्य पर एक कॉल विकल्प बेचता है।

  • यदि शेयर की कीमत ₹120 तक बढ़ जाती है, तो निवेशक को ₹10 का लाभ होगा (₹120 – ₹110)।
  • यदि शेयर की कीमत ₹110 से नीचे रहती है, तो निवेशक को ₹10 का नुकसान होगा (कॉल विकल्प प्रीमियम)।

यह केवल एक उदाहरण है, और विभिन्न प्रकार की ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीतियाँ उपलब्ध हैं।

यह महत्वपूर्ण है कि आप अपनी जोखिम सहनशीलता और निवेश लक्ष्यों के लिए उपयुक्त रणनीति चुनें।

अतिरिक्त जानकारी:

  • ऑप्शन ट्रेडिंग में जोखिम शामिल है।
  • ऑप्शन ट्रेडिंग शुरू करने से पहले, आपको विकल्पों के बारे में अच्छी तरह से समझना चाहिए।
  • विभिन्न प्रकार की ऑप्शन ट्रेडिंग रणनीतियों के बारे में जानने के लिए कई ऑनलाइन संसाधन उपलब्ध हैं।

यह पुस्तक केवल शैक्षिक उद्देश्यों के लिए है और इसे वित्तीय सलाह के रूप में नहीं माना जाना चाहिए।

अध्याय 10: डेरिवेटिव ट्रेडिंग

डेरिवेटिव ट्रेडिंग क्या है?

डेरिवेटिव ट्रेडिंग एक प्रकार की वित्तीय ट्रेडिंग है जिसमें अंतर्निहित परिसंपत्ति के मूल्य पर आधारित अनुबंधों का व्यापार होता है। अंतर्निहित परिसंपत्ति शेयर, कमोडिटी, मुद्रा, या बांड हो सकती है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग दो पक्षों के बीच एक अनुबंध है, जिसमें एक पक्ष (खरीदार) दूसरे पक्ष (विक्रेता) को एक निश्चित तिथि या उससे पहले एक निश्चित मूल्य पर अंतर्निहित परिसंपत्ति खरीदने या बेचने का अधिकार (लेकिन दायित्व नहीं) खरीदता है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के कुछ लाभ:

  • यह आपको कम पूंजी के साथ बड़ी मात्रा में अंतर्निहित परिसंपत्ति में निवेश करने की अनुमति देता है।
  • यह आपको जोखिम को कम करने और अपनी रणनीति को हेज करने में मदद कर सकता है।
  • यह आपको विभिन्न प्रकार की ट्रेडिंग रणनीतियों का उपयोग करने की अनुमति देता है।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग के कुछ जोखिम:

  • यह बहुत जटिल हो सकता है और शुरुआती लोगों के लिए अनुशंसित नहीं है।
  • यह बहुत अस्थिर हो सकता है और आपको बहुत अधिक पैसा खोने का खतरा होता है।
  • अनुबंधों की समाप्ति तिथि होती है, जिसके बाद आपको अंतर्निहित परिसंपत्ति खरीदने या बेचने की आवश्यकता हो सकती है, भले ही आप ऐसा न करना चाहते हों।

डेरिवेटिव ट्रेडिंग रणनीतियाँ:

1. कॉल ऑप्शन रणनीति:

यह रणनीति आपको यह अनुमान लगाने की अनुमति देती है कि अंतर्निहित परिसंपत्ति का मूल्य बढ़ेगा। यदि आप सही हैं, तो आप अनुबंध से लाभ कमा सकते हैं। यदि आप गलत हैं, तो आप केवल प्रीमियम खो देंगे।

उदाहरण:

मान लीजिए कि XYZ कंपनी के शेयर का मूल्य ₹100 है। आप ₹110 के स्ट्राइक मूल्य के साथ एक कॉल ऑप्शन खरीदते हैं। यदि शेयर का मूल्य ₹120 तक बढ़ जाता है, तो आप अनुबंध से ₹10 का लाभ कमा सकते हैं।

2. पुट ऑप्शन रणनीति:

यह रणनीति आपको यह अनुमान लगाने की अनुमति देती है कि अंतर्निहित परिसंपत्ति का मूल्य घटेगा। यदि आप सही हैं, तो आप अनुबंध से लाभ कमा सकते हैं। यदि आप गलत हैं, तो आप केवल प्रीमियम खो देंगे।

उदाहरण:

मान लीजिए कि XYZ कंपनी के शेयर का मूल्य ₹100 है। आप ₹90 के स्ट्राइक मूल्य के साथ एक पुट ऑप्शन खरीदते हैं। यदि शेयर का मूल्य ₹80 तक गिर जाता है, तो आप अनुबंध से ₹10 का लाभ कमा सकते हैं।

3. फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट रणनीति:

यह रणनीति आपको एक निश्चित तिथि पर एक निश्चित मूल्य पर अंतर्निहित परिसंपत्ति खरीदने या बेचने के लिए अनुबंधित करती है।

उदाहरण:

मान लीजिए कि XYZ कंपनी के शेयर का मूल्य ₹100 है। आप ₹110 के मूल्य पर एक फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट खरीदते हैं। यदि शेयर का मूल्य ₹120 तक बढ़ जाता है, तो आप अनुबंध से ₹10 का लाभ कमा सकते हैं।

4. फॉरवर्ड कॉन्ट्रैक्ट रणनीति:

यह रणनीति फ्यूचर्स कॉन्ट्रैक्ट के समान है, लेकिन यह एक निश्चित एक्सचेंज पर कारोबार नहीं करता है।

**यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि डेरिवेटिव ट्रेडिंग बहुत जटिल हो सकती है और शुरुआती लोगों के लिए अनुशंसित नहीं है। यदि आप डेरिवेटिव ट्रेडिंग में रुचि रखते हैं, तो आपको पहले इसके बारे में अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए.

अध्याय 11: जोखिम प्रबंधन

1. शेयर बाजार में जोखिम:

  • सिस्टमैटिक जोखिम: यह बाजार से संबंधित जोखिम है जिसे नियंत्रित नहीं किया जा सकता है। इसमें आर्थिक मंदी, राजनीतिक अस्थिरता, और प्राकृतिक आपदाएं शामिल हैं।
  • अनसिस्टमैटिक जोखिम: यह जोखिम किसी विशिष्ट कंपनी या उद्योग से संबंधित है। इसमें कंपनी के खराब प्रदर्शन, प्रबंधन में बदलाव, और प्रतिस्पर्धा में वृद्धि शामिल हैं।
  • व्यक्तिगत जोखिम: यह जोखिम आपके निवेश लक्ष्यों, समय क्षितिज, और जोखिम सहनशीलता से संबंधित है। इसमें गलत समय पर निवेश करना, भावनाओं से प्रेरित निर्णय लेना, और अपर्याप्त ज्ञान के साथ निवेश करना शामिल हैं।

2. जोखिम प्रबंधन रणनीतियाँ:

  • विविधीकरण: अपने निवेश को विभिन्न प्रकार के शेयरों, उद्योगों, और परिसंपत्ति वर्गों में फैलाना।
  • स्टॉप-लॉस ऑर्डर का उपयोग करना: यह एक प्रकार का ऑर्डर है जो आपके शेयरों को एक निश्चित मूल्य पर स्वचालित रूप से बेच देगा यदि वे उस मूल्य से नीचे गिर जाते हैं।
  • फंडामेंटल विश्लेषण: किसी कंपनी में निवेश करने से पहले उसकी वित्तीय स्थिति, प्रबंधन, और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन करना।
  • तकनीकी विश्लेषण: शेयर की कीमतों के ऐतिहासिक डेटा का उपयोग करके भविष्य के रुझानों का अनुमान लगाना।
  • जोखिम सहनशीलता का आकलन करना: यह जानना कि आप कितना जोखिम उठाने के लिए तैयार हैं।
  • भावनाओं पर नियंत्रण रखना: निवेश करते समय तर्कसंगत निर्णय लेना और भावनाओं से प्रेरित न होना।

उदाहरण:

  • मान लीजिए कि आप ₹10,000 का निवेश करना चाहते हैं। आप विभिन्न प्रकार के शेयरों, उद्योगों, और परिसंपत्ति वर्गों में निवेश करके अपने जोखिम को कम कर सकते हैं। आप ₹5,000 बड़े और स्थापित कंपनियों के शेयरों में, ₹2,500 मध्यम आकार की कंपनियों के शेयरों में, और ₹2,500 छोटी कंपनियों के शेयरों में निवेश कर सकते हैं।
  • आप स्टॉप-लॉस ऑर्डर का उपयोग करके अपने नुकसान को सीमित कर सकते हैं। मान लीजिए कि आप ₹100 प्रति शेयर पर XYZ कंपनी के शेयर खरीदते हैं। आप ₹95 प्रति शेयर पर स्टॉप-लॉस ऑर्डर लगा सकते हैं। यदि शेयर की कीमत ₹95 से नीचे गिरती है, तो आपके शेयर स्वचालित रूप से बेच दिए जाएंगे और आपको ₹5 प्रति शेयर का नुकसान होगा।
  • आप फंडामेंटल विश्लेषण का उपयोग करके यह तय कर सकते हैं कि किसी कंपनी में निवेश करना है या नहीं। आप कंपनी के वित्तीय विवरणों, प्रबंधन टीम, और भविष्य की संभावनाओं का मूल्यांकन कर सकते हैं।

यह ध्यान रखना महत्वपूर्ण है कि जोखिम प्रबंधन रणनीतियाँ 100% प्रभावी नहीं हैं। हालांकि, वे आपके निवेश के नुकसान को कम करने और शेयर बाजार में सफलता की संभावना बढ़ाने में मदद कर सकते हैं।

अध्याय 12: अनुशासन

शेयर बाजार में अनुशासन का महत्व

शेयर बाजार में सफलता के लिए अनुशासन अत्यंत महत्वपूर्ण है। अनुशासित ट्रेडिंग आपको अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने, अपनी योजनाओं का पालन करने और गलतियों से बचने में मदद करती है।

अनुशासन के बिना, आप:

  • भावनाओं में बहकर गलत निर्णय ले सकते हैं
  • अपनी योजनाओं से विचलित हो सकते हैं
  • घाटे में जाने पर घबराकर बेच सकते हैं
  • लाभ में जाने पर लालच में आकर अधिक समय तक शेयर रख सकते हैं

अनुशासित ट्रेडिंग रणनीतियाँ

यहां कुछ अनुशासित ट्रेडिंग रणनीतियाँ दी गई हैं:

  • एक ट्रेडिंग योजना बनाएं और उसका पालन करें। अपनी योजना में अपनी प्रवेश और निकास रणनीति, जोखिम प्रबंधन योजना और लक्ष्य शामिल करें।
  • अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें। डर, लालच, और आशावाद जैसी भावनाओं को अपने निर्णयों को प्रभावित न करने दें।
  • अपने जोखिम को सीमित करें। प्रत्येक व्यापार में अपनी जोखिम राशि को सीमित करें।
  • अपने लाभों को सुरक्षित रखें। स्टॉप-लॉस ऑर्डर का उपयोग करके अपने लाभों को सुरक्षित रखें।
  • अपनी गलतियों से सीखें। अपनी गलतियों का विश्लेषण करें और उनसे सीखें।

उदाहरण:

मान लीजिए कि आपने एक शेयर खरीदा है और आपकी योजना है कि जब शेयर का मूल्य 10% बढ़ जाए तो आप उसे बेच देंगे। यदि शेयर का मूल्य 5% बढ़ जाता है, तो आपको लालच में आकर उसे नहीं बेचना चाहिए। आपको अपनी योजना का पालन करना चाहिए और शेयर का मूल्य 10% बढ़ने तक इंतजार करना चाहिए।

निष्कर्ष:

शेयर बाजार में अनुशासित ट्रेडिंग सफलता के लिए आवश्यक है। अपनी भावनाओं को नियंत्रित करने, अपनी योजनाओं का पालन करने और गलतियों से बचने के लिए अनुशासित ट्रेडिंग रणनीतियाँ विकसित करें.

अतिरिक्त टिप्पणियाँ:

  • अनुशासित ट्रेडिंग रणनीतियाँ विकसित करने के लिए समय और प्रयास की आवश्यकता होती है।
  • अनुशासित ट्रेडिंग रणनीतियाँ आपको गारंटीकृत सफलता प्रदान नहीं करती हैं, लेकिन वे आपके सफल होने की संभावनाओं को बढ़ा सकती हैं.

यहां कुछ अतिरिक्त संसाधन दिए गए हैं जो आपको अनुशासित ट्रेडिंग रणनीतियाँ विकसित करने में मदद कर सकते हैं:

  • Trading Psychology 2.0 by Mark Douglas
  • The Disciplined Trader by Mark Douglas
  • The Mental Game of Trading by Jared Tendler

अंत में, याद रखें कि शेयर बाजार में अनुशासित ट्रेडिंग एक सतत प्रक्रिया है। आपको लगातार अपनी रणनीतियों की समीक्षा करनी चाहिए और उन्हें अपनी आवश्यकताओं के अनुसार समायोजित करना चाहिए.

अध्याय 13: शेयर बाजार से संबंधित शब्दावली

यह अध्याय शेयर बाजार से संबंधित कुछ महत्वपूर्ण शब्दों और वाक्यांशों की व्याख्या करेगा।

शब्दव्याख्याउदाहरण
बाजार पूंजीकरणकिसी कंपनी का कुल मूल्य, जो उसके शेयरों की कुल संख्या और प्रति शेयर मूल्य द्वारा गुणा करके ज्ञात किया जाता है।रिलायंस इंडस्ट्रीज का बाजार पूंजीकरण ₹16 लाख करोड़ है।
बुल मार्केटएक ऐसी स्थिति जब शेयर बाजार लगातार बढ़ रहा होता है।2021 में, भारतीय शेयर बाजार एक बुल मार्केट में था।
बियर मार्केटएक ऐसी स्थिति जब शेयर बाजार लगातार गिर रहा होता है।2022 में, भारतीय शेयर बाजार एक बियर मार्केट में था।
डिविडेंडकंपनी द्वारा अपने शेयरधारकों को दिए जाने वाले लाभ का हिस्सा।रिलायंस इंडस्ट्रीज ने ₹15 प्रति शेयर का डिविडेंड घोषित किया।
ब्लू चिप स्टॉकएक बड़ी, स्थापित कंपनी का शेयर जो लगातार लाभांश का भुगतान करता है।टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (TCS) एक ब्लू-चिप स्टॉक है।
मिडकैप स्टॉकमध्यम आकार की कंपनी का शेयरदीपक नाइट्राइट एक मिड कैप स्टॉक है
स्मॉल कैप स्टॉकछोटी कंपनी का शेयरFine organics एक स्मॉल कैप स्टॉक है.
आईपीओप्रारंभिक सार्वजनिक पेशकश, जब कोई कंपनी पहली बार अपने शेयरों को जनता को बेचती है।LIC ने 2022 में अपना आईपीओ लॉन्च किया था।
एमएफसीम्यूचुअल फंड कंपनी, जो निवेशकों से पैसे इकट्ठा करती है और उन्हें विभिन्न प्रकार के प्रतिभूतियों में निवेश करती है।SBI Mutual Fund एक एमएफसी है।
डीमैट खाताएक इलेक्ट्रॉनिक खाता जिसमें शेयरों को जमा किया जाता है।आप अपनी डीमैट खाता बैंक या ब्रोकर के माध्यम से खोल सकते हैं।
ट्रेडिंग खाताएक खाता जो आपको शेयरों को खरीदने और बेचने की अनुमति देता है।आप अपनी ट्रेडिंग खाता ब्रोकर के माध्यम से खोल सकते हैं।
ब्रोकरेजशेयरों को खरीदने और बेचने के लिए ब्रोकर द्वारा लिया जाने वाला शुल्क।Upstox एक डिस्काउंट ब्रोकर है जो कम ब्रोकरेज शुल्क लेता है।

अध्याय 14: शेयर बाजार के बारे में पुस्तकें और संसाधन

यह अध्याय शेयर बाजार के बारे में कुछ उपयोगी पुस्तकों और संसाधनों की सूची प्रदान करेगा।

पुस्तकें:

  • “द इंटेलिजेंट इन्वेस्टर” by Benjamin Graham
  • “द लिटिल बुक ऑफ कॉमन सेंस इन्वेस्टिंग” by John C. Bogle
  • “वन अप ऑन वॉल स्ट्रीट” by Peter Lynch
  • “द रिच डैड, पुअर डैड” by Robert Kiyosaki
  • “द कॉम्पाउंडिंग इफेक्ट” by Darren Hardy

संसाधन:

यह केवल कुछ उपयोगी पुस्तकों और संसाधनों की एक सूची है। शेयर बाजार के बारे में कई अन्य पुस्तकें और संसाधन उपलब्ध हैं।

अध्याय 15: शेयर बाजार में सफल होने के लिए टिप्स

यह अध्याय शेयर बाजार में सफल होने के लिए कुछ उपयोगी टिप्स प्रदान करेगा।

टिप्स:

  • अपना शोध करें: किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले, उसके बारे में अच्छी तरह से शोध करें।
  • दीर्घकालिक निवेश करें: शेयर बाजार में धैर्य और अनुशासन महत्वपूर्ण हैं।
  • अपने जोखिम को प्रबंधित करें: अपनी पूरी पूंजी को एक ही कंपनी में न लगाएं।
  • अपनी भावनाओं को नियंत्रित करें: शेयर बाजार में भावनाओं से बचें।
  • विशेषज्ञों से सलाह लें: यदि आपको आवश्यकता हो तो वित्तीय सलाहकार से सलाह लें।

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