सेंसेक्स और निफ्टी क्या हैं और इनमें क्या अंतर है? | What is Sensex and Nifty in Hindi

अगर आप शेयर मार्केट से Trading या Investing करके पैसे कमाना चाहते हैं लेकिन आपको सेंसेक्स और निफ्टी की पूरी जानकारी नहीं है तो आप कभी भी शेयर मार्केट से पैसा नहीं कमा सकते हैं क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी शेयर बाजार के दो बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्से हैं।आपने अक्सर टीवी या न्यूज़पेपर में यह जरूर सुना या देखा होगा जैसे-

  • सेंसेक्स आज इतना अंक ऊपर चला गया,
  • आज सेंसेक्स और निफ्टी में हुई भारी गिरावट,
  • सेंसेक्स और निफ्टी के गिरने से निवेशकों को हुआ भारी नुकसान।

तो आखिर क्यों इसे न्यूज़ में दिखाया जाता है और ये इतना पॉपुलर क्यों है?

वो शायद इसीलिए क्योंकि आप सिर्फ सेंसेक्स और निफ्टी को देखकर ही शेयर मार्केट का हाल जान सकते हैं, ये पता लगा सकते हैं कि आज मार्केट ऊपर जाएगा या नीचे। इसीलिए आपको सेंसेक्स और निफ्टी के बारे में पूरी जानकारी होना बहुत जरूरी है।

इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपके मन में सेंसेक्स और निफ्टी के बारे में जितने भी सवाल हैं उन सबका जवाब मिल जाएगा जैसे;

  • सेंसेक्स और निफ्टी क्या है,
  • सेंसेक्स और निफ्टी में क्या अंतर है,
  • Sensex और Nifty में तेजी और गिरावट क्यों आती है,
  • Sensex और Nifty काम कैसे करता है,
  • निफ्टी और सेंसेक्स में कितनी और कौन सी कंपनियां आती हैं,
  • सेंसेक्स और निफ्टी कैसे बनता है और इनकी कैलकुलेशन कैसे करते हैं?
  • क्या एक ही कंपनी BSE और NSE दोनों में लिस्ट हो सकती है?

इन सभी सवालों के जवाब आज हम आपको उदाहरण के द्वारा बिल्कुल आसान भाषा में बताने वाले हैं तो इस पोस्ट को पूरा अंत तक जरूर पढ़िएगा। मैं आपको गारंटी देता हूं इस पोस्ट को पढ़ने के बाद आपके मन में सेंसेक्स और निफ्टी से जुड़ा कोई भी सवाल बाकी नहीं रहेगा।

ये भी पढ़ें: शेयर मार्केट की पूूरी जानकारी हिंदी में

तो आइये जान लेते हैं सेंसेक्स और निफ्टी के बारे में:

सेंसेक्स और निफ्टी क्या हैं?

सेंसेक्स और निफ्टी India की टॉप कंपनीस का एक BenchMark index है जो देश की सबसे बड़ी कंपनियों की performance को दर्शाता है। इन टॉप कंपनीज के परफॉर्मेंस के आधार पर ही सेंसेक्स और निफ्टी का प्राइस बढ़ता है या घटता है।

आसान शब्दों में कहें तो, सेंसेक्स और निफ्टी ऐसे नंबर (संख्या) या अंक होते हैं या फिर एक value होती है जो शेयर मार्केट में होने वाले उतार-चढ़ाव को दर्शाती हैं इसी वैल्यू को हम सेंसेक्स या निफ्टी कहते हैं। इसके बढ़ने या घटने से यह पता चलता है कि देश की सबसे बड़ी कंपनियों को profit हो रहा है या loss हो रहा है।

अगर सेंसेक्स या निफ़्टी बढ़ता है या ऊपर जाता है या इसमें उछाल आती है तो इसका मतलब है कि देश की सबसे बड़ी कंपनियों को मुनाफा (profit) हो रहा है और इसके बढ़ने से इन कंपनियों के शेयर का प्राइस भी बढ़ जाता है। और इसी समय बोला जाता है कि सेंसेक्स आज इतना अंक ऊपर चढ़ गया जिससे निवेशकों (investors) को मुनाफा हुआ और वह मुनाफा भी इसीलिए होता है क्योंकि जिन लोगों ने इन टॉप बड़ी कंपनियों के शेयर खरीदे होते हैं तो जब उनका शेयर प्राइस बढ़ जाता है तो वो share को बेचकर मुनाफा कमा सकते हैं।

ठीक इसके विपरीत जब सेंसेक्स या निफ़्टी कम होता है या नीचे जाता है या इसमें गिरावट आती है तो इसका मतलब है कि देश की सबसे बड़ी कंपनियों को नुकसान (Loss) हो रहा है और इन कंपनियों के शेयर का प्राइस नीचे जा रहा है। और इसी समय बोला जाता है कि आज सेंसेक्स और निफ्टी में आई भारी गिरावट जिससे लोगों का हुआ करोड़ों का नुकसान।

तो अब आप समझ गए होंगे कि लोगों का करोड़ों का नुकसान या फायदा क्यों होता है सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़ने या घटने से। वो इसीलिए क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी के बढ़ने से शेयर का प्राइस बढ़ जाता है और घटने से शेयर का प्राइस कम हो जाता है।

हम आपको आगे यह भी बताएंगे कि आखिर यह सेंसेक्स और निफ्टी घटते या बढ़ते क्यों है इसके अलावा भी और बहुत सारी चीजें तो आगे पढ़ते रहिए-

What is Sensex and Nifty in Hindi

Sensex और Nifty को समझने से पहले आपको Stock Exchange और index को समझना होगा क्योंकि सेंसेक्स और निफ्टी भी इंडेक्स या बेंचमार्क हैं BSE और NSE की।

स्टॉक एक्सचेंज क्या होते हैं?

जैसा कि हमें पता है शेयर मार्केट एक ऐसी जगह है जहां पर हम कंपनियों के Stocks को खरीदते और बेचते हैं तो इंडिया में Stocks को खरीदने बेचने के लिए दो बाजार हैं पहला  Bombay Stock Exchange (BSE) और दूसरा National Stock Exchange (NSE)

इन दोनों स्टॉक एक्सचेंज पर भारत की टॉप कंपनियां लिस्ट होती हैं और फिर हम इनके शेयर्स को खरीदते हैं। हर कंपनी के पास अधिकार होता है कि उसे BSE पर लिस्ट होना है या NSE पर. अगर कंपनी चाहे तो दोनों एक्सचेंज पर भी लिस्ट हो सकती है. बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) और नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) दुनिया के टॉप 10 स्टॉक एक्सचेंज की लिस्ट में आते हैं।

BSE में 5000 से भी ज्यादा कंपनियां लिस्टेड हैं जिनमें से 500 कंपनीस ही ऐसी हैं जो अकेले पूरे Market Capitalization का 90% है जबकि NSE में 1600 से ज्यादा कंपनियां listed है।

जिस तरह से इंडिया में BSE और NSE दो मुख्य स्टॉक एक्सचेंज है उसी तरह से इंटरनेशनल मार्केट में भी स्टॉक एक्सचेंज है जैसे अमेरिका में “न्यूयॉर्क स्टॉक एक्सचेंज” और जापान में “जापान एक्सचेंज ग्रुप” हैं तो बड़े-बड़े देशों में भी उनका अलग-अलग स्टॉक एक्सचेंज है और हर स्टॉक एक्सचेंज का Nifty और Sensex की तरह अलग index है जैसे जापान की इंडेक्स का नाम है “निक्केई 225

Sensex और Nifty को क्यों बनाया गया है?

अब मान लो आपको यह पता लगाना है कि आज share market कल के मुकाबले कितना ऊपर या नीचे है तो आपको काफी मेहनत करनी होगी। सबसे आपको पहले सभी कंपनियों का शेयर प्राइस देखना होगा कि कल इनका प्राइस कितना था और आज कितना हुआ है फिर उसका Total करना होगा और फिर कल और आज के प्राइस की तुलना करने पर आपको पता चलेगा कि आज शेयर मार्केट up है या down.

सचमुच इस काम में बहुत झंझट है क्योंकि अगर आपको मार्केट की स्थिति का पता करना है कि मार्किट किस रफ्तार से grow कर रहा है या नीचे जा रहा है तो यह पता करने के लिए काफी समस्या आ जाएगी और इसी समस्या से निपटने के लिए सेंसेक्स और निफ्टी को बनाया गया है। आप सिर्फ इन्हें देखकर ही कंपनियां कैसे perform कर रही हैं ये पता लगा सकते हैं।

Example: मान लो अगर आपको पता करना है कि जब लॉकडाउन लगा था या फिर इंडिया में कोई बुरा time आया था तो उसका शेयर मार्केट पर क्या असर पड़ा था तो हम यह पता लगा ही नहीं सकते हैं बिना निफ्टी और सेंसेक्स को देखे। इसीलिए सेंसेक्स और निफ्टी को बनाया गया है ताकि हम लोग आसानी से मार्केट का हाल जान सके।

सेंसेक्स और निफ्टी में Index क्या है?

सेंसेक्स और निफ्टी खुद एक Index यानी सूचकांक हैं इंडिया की टॉप कंपनियों का। सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज की टॉप कंपनीस का index है और निफ्टी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज की टॉप कंपनीस का index है.

Index का मतलब है भारत की टॉप कंपनियों की एक लिस्ट बनाकर, Top 30 या Top 50 कंपनियों की, और फिर उन सभी कंपनियों की टोटल मार्केट कैप का एवरेज निकालकर हमें एक value दिखाई जाती है और उस Value को ही हम सेंसेक्स या निफ़्टी कहते हैं.

किसी भी देश की economic developement का पता लगाने के लिए, उस देश की टॉप कंपनीस के शेयर्स की performance देखकर अंदाजा लगाया जाता है स्टॉक मार्केट में तो हजारों कंपनियां लिस्टेड है तो अगर हमें मार्केट की परफॉर्मेंस को जानना है तो एक समय पर हर एक कंपनी के स्टॉक को ट्रैक करना मुश्किल है तो इसीलिए एक sample लिया जाता है सभी कंपनियों का, जो पूरे मार्केट को represent करता है और इसी सैंपल को हम ‘index’ बोलते हैं।

BSE के index को हम Sensex बोलते हैं और NSE के index को Nifty

सेंसेक्स क्या है?

Sensex meaning in Hindi: Sensex शब्द Sensitivity और Index से मिलकर बना है जिसे हिंदी में संवेदी सूचकांक भी कहते हैं। सेंसेक्स की शुरुआत 1986 से हुई थी और उस समय सेंसेक्स की base value ₹100 थी और आज ₹60,000 के लगभग है तो आप अंदाजा लगा सकते हैं कि sensex किस स्पीड से बढ़ रहा है।

जैसा कि इसके नाम से ही हमें पता लगता है कि यह मार्केट की Sensitivity दर्शाता है। सेंसटिविटी मतलब मार्केट के बारे में लोगों की सोच क्या है क्योंकि लोगों की सोच से मार्केट पर बहुत प्रभाव पड़ता है अगर लोग सोचते हैं कि कोई शेयर बहुत ऊपर जाएगा तो वह उसे जल्दी-जल्दी खरीदने लगते हैं जिससे शेयर का प्राइस बढ़ जाता है ठीक इसी तरह जब लोग किसी शेयर के बारे में नेगेटिव सोचते हैं तो उसका शेयर प्राइस कम हो जाता है।

Sensex इंडिया की अलग-अलग sectors की 30 सबसे बड़ी कंपनियों से मिलकर बनता है। जैसे: Health sector, Finance sector, Education sector आदि।

अब आप सोचोगे कि इसमें तो सिर्फ 30 कंपनी है तो यह पूरे मार्केट की सेंसिटिविटी कैसे बता सकता है क्योंकि मार्केट में तो हजारों कंपनियां होती हैं। तो आपका सवाल बिल्कुल सही है।

और इस सवाल का जवाब है कि अगर आप सेंसेक्स का मार्केट कैप देखोगे तो आपको पता चल जाएगा कि पूरे स्टॉक मार्केट का लगभग 50 प्रतिशत value यही Top 30 या Top 50  कंपनियां कवर कर लेती है और यही निफ्टी के साथ भी होता है क्योंकि उसमें भी केवल 50 कंपनियां हैं जो भारत की सबसे बड़ी कंपनियां हैं।

सेंसेक्स को BSE30 भी बोला जाता है क्योंकि इसके अंदर भी BSE में लिस्टेड 5500 कंपनीस में से केवल Top 30 कंपनीस को ही सिलेक्ट किया जाता है उनके Market Capitalization के आधार पर, कुछ बड़ी कम्पनियां जोकि BSE में listed हैं जैसे: Infosys, ITC, Hero आदि।

निफ्टी क्या है?

Nifty meaning in Hindi: Nifty शब्द National stock exchange के National और Fifty यानी ’50’ से मिलकर बना है. Fifty इसीलिए क्योंकि Nifty इंडिया की टॉप 50 कंपनियों से मिलकर बना है. Nifty की शुरुआत 1994 को हुयी और इसकी base value ₹1000 रखी गई और आज Nifty की वैल्यू ₹16000 से भी ज्यादा है।

इन टॉप 50 कंपनियों का मार्केट कैप देखें तो बाकी हजारों कंपनीस के मार्केट कैप के बराबर है क्योंकि ये इंडिया की सबसे ज्यादा liquid कंपनी है। liquid कंपनी मतलब वह कंपनी जिसमें काफी ज्यादा मात्रा में शेयर्स को खरीदा और बेचा जाता है। और इन कंपनियों के स्टॉक्स को आप आसानी से खरीद या बेच सकते हैं ।

क्योंकि इंडिया में ऐसे बहुत सारे छोटे-मोटे Stocks हैं जिनके शेयर्स को आप खरीद या बेच नहीं सकते हैं तो जब आप इन्हें खरीदने के लिए आर्डर लगाते हैं तो आपका आर्डर पेंडिंग में चला जाता है। इसीलिए ऐसे स्टॉक्स को खरीदने से बचें और हमेशा अच्छी कंपनी में ही अपना पैसा invest करें अगर हो सके तो इन Top 50 कंपनी के ही स्टॉक्स खरीदें।

Nifty को Nifty50 भी बोला जाता है क्योंकि इसके अंदर टॉप 50 कंपनीस आती हैं।

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Sensex और Nifty में तेजी और गिरावट क्यों आती है?

Demand और Supply नियम के आधार पर सेंसेक्स और निफ्टी में भी उतार-चढ़ाव आता है।

जैसे: मान लीजिए जब कोई कंपनी अच्छा Profit कमाती है तो उस कंपनी के shares की demand उसकी Supply की तुलना में बहुत बढ़ जाती है जिससे शेयर का प्राइस भी increase हो जाता है और जब कंपनी को Loss होता है तो उसके shares की demand कम हो जाती है जिससे उसके शेयर का भाव कम हो जाता है।

ठीक ऐसा ही सेंसेक्स और निफ्टी के प्राइस में भी होता है लेकिन फर्क सिर्फ इतना है कि यह पूरे मार्केट को दर्शाता है इससे घटने या बढ़ने से पूरा मार्केट ही Up या Down हो जाता है। जब मार्केट ऊपर जाता है यानी कि Sensex या Nifty के points में उछाल देखने को मिलती है तो उसे Bull Market कहते हैं और जब मार्केट नीचे जाता है यानी कि सेंसेक्स और निफ्टी की value में गिरावट आती है तो उसे Bear Market कहते हैं।

Example: मान लीजिए आज सेंसेक्स 50000 points पर है, अगर यह ऊपर जाता है मतलब पॉइंट्स increase होते हैं तो इसका मतलब है कि Top30 कंपनीस में से ज्यादातर कंपनियों की Financial Performance अच्छी है और कंपनी इसको प्रॉफिट हो रहा है लोग इनके shares को ज्यादा Buy कर रहे हैं। और अगर पॉइंट्स नीचे जाते हैं तो इसका मतलब है कि ज्यादातर कंपनियों की Financial condition अच्छी नहीं है जिससे उनके शेयर का प्राइस भी गिर जाता है.

अगर सेंसेक्स ऊपर जाता है तो यह economic growth के sign होता है जैसे 2008 या 2009 में जब Recession यानी व्यापारिक मंदी आई थी उससे पहले Sensex 21000 पॉइंट्स पर था लेकिन इस मंदी के बाद यह गिरकर 8900 पॉइंट्स पर आ गया था।

उस समय सेंसेक्स के गिरने का कारण यह था कि लोगों ने सास को बेचना चालू कर दिया था इससे देश में economic crisis की स्थिति पैदा हो गई थी इसीलिए हम सेंसेक्स के आधार पर हम यह decide करते हैं कि मार्केट ऊपर जा रहा है या नीचे जा रहा है और country की economic growth कैसी है।

बजट के समय Sensex क्यों बदलता है?

आपने एक बात जरूर नोटिस की होगी कि जब बजट Announce किया जाता है तो सेंसेक्स में काफी Fluctuations (उतार-चढ़ाव) देखने को मिलते हैं तो अगर बजट मार्केट के लिए पॉजिटिव होता है तो सेंसेक्स और निफ्टी ऊपर जाता है और जब बजट मार्केट के लिए नेगेटिव होता है तो यह नीचे जाता है।

क्या एक ही कंपनी BSE और NSE दोनों में लिस्ट हो सकती है?

जी हाँ बिल्कुल, कोई भी कंपनी चाहे तो वह BSE और NSE दोनों एक्सचेंज पर लिस्ट हो सकती है। इसे एक उदाहरण के द्वारा समझते हैं:

Example: जब आप online कोई product खरीदते हैं तुम और सारी वेबसाइट है जहां से आप उसे खरीद सकते हो जैसे कि amazon और flipkart तो वह same प्रोडक्ट दोनों ही वेबसाइट पर avaliable होता है फिर आपको जिस भी वेबसाइट पर वह प्रोडक्ट और उसका प्राइस सही लगता है आप वहाँ से खरीद लेते हैं।

ठीक इसी प्रकार आपको एक ही कंपनी का शेयर NSE और BSE दोनों पर देखने को मिलता है अभी आप की choice है कि आपको कहां से खरीदना है। मतलब कि एक कंपनी एक से ज्यादा स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्ट हो सकती है और हर जगह उसके शेयर का प्राइस अलग-अलग हो सकता है क्योंकि यह पूरी तरह से buyers और sellers पर depend करता है।

जिस तरह से हर मार्केट में एक ही चीज का प्राइस अलग अलग होता है ठीक उसी प्रकार BSE और NSE में भी एक ही कंपनी के शेयर का प्राइस अलग-अलग देखने को मिलता है।

सेंसेक्स और निफ्टी को कैसे कैलकुलेट किया जाता है?

2003 से पहले सेंसेक्स और निफ्टी को कंपनीस की मार्केट कैपिटलाईजेशन के आधार पर कैलकुलेट किया जाता था लेकिन 2003 के बाद से इसे Free Float Market Capitalization के आधार पर कैलकुलेट किया जाता है।

Free Float Market Capitalization क्या है यह समझने से पहले आपको Market Capitalization के बारे में पता होना चाहिए।

Market Capitalization: मान लीजिए कोई ABC कंपनी है जिसके Total Shares 500 हैं। इन 500 शेयर्स में से 400 शेयर्स जनरल पब्लिक के लिए हैं और बचे हुए 100 शेयर्स कंपनी के Promoters और owners के पास है और प्रत्येक share का प्राइस ₹100 है तो कंपनी की Total Valuation होगी,
Total shares × Price per share मतलब 500×100 = ₹50000 उस कंपनी की कुल वैल्यू है, इसे ही Market Capitalization कहते हैं।

Free Float Market Capitalization का मतलब है कि उस कंपनी के Promoters या owners के शेयर्स को नहीं गिना जाता है जबकि Market Capitalization में Retail Investor यानी Public के shares के साथ-साथ कंपनी के Owners के शेयर्स को भी जोड़ा जाता है।

जैसे: पहले वाले उदाहरण में जो 400 शेयर्स पब्लिक के लिए थे केवल वही count किए जाएंगे ना कि वो 100 shares जो company के management के पास थे।
तो अब Free Float Market Capitalization हो जाएगा;
Number of general public shares × price per share यानी कि 400×100= 40000 उस कंपनी की Free Float Market Capitalization कहलाएगी।

आइए इसे एक example के द्वारा समझते हैं;

Example: मान लीजिये एक मार्केट में केवल दो कंपनियां हैं ABC और XYZ
इनमें से ABC कम्पनी की Free Float Market Capitalization 50000 है और XYZ कम्पनी की Free Float Market Capitalization 40000 है तो पूरे मार्केट की Free Float Market Capitalization हो जाएगी 50000+40000= 90000 ये पूरे मार्केट की Free Float Market Capitalization है और इसी के द्वारा हम सेंसेक्स को कैलकुलेट करते हैं।

Example: मान लीजिए जब पहली बार सेंसेक्स कैलकुलेट किया गया था तो मार्केट वैल्यू 10000 थी अब हमें इस 10000 को 100 पॉइंट्स के बराबर मान लेना है इसे ही हम base index बोलते हैं।

तो पहली बार जब BSE ने सेंसेक्स कैलकुलेट किया था तो Base value को 100 point रखा गया था। यह 100 केवल इसीलिए रखा गया था ताकि कैलकुलेशन आसान हो सके। इसी तरह जब निफ्टी को शुरू किया गया था तो NSE के द्वारा Base value को 1000 रखा गया था।

तो सेंसेक्स को कैलकुलेट करने के लिए अभी जो पूरे मार्केट का Total Free Float Market Capitalisation है उसे 100 से डिवाइड कर देंगे तो जो वैल्यू आएगी उसे ही हम ‘सेंसेक्स’ बोलते हैं और यह Sensex की value समय-समय पर बदलती रहती है।

ठीक इसी प्रकार निफ्टी को भी कैलकुलेट किया जाता है मतलब पूरे मार्केट की Total Free Float Market Capitalisation में 1000 को devide यानी भाग करने पर Nifty की value आ जाती है।

सेंसेक्स और निफ्टी में क्या अंतर है?

वैसे तो सेंसेक्स और निफ्टी दोनों ही इंडिया की टॉप 30 और टॉप 50 कंपनियों का index हैं और दोनों ही हमें शेयर मार्केट में होने वाली हलचल के बारे में बताती हैं लेकिन फिर भी इन दोनों के बीच कुछ अंतर है जो इस प्रकार हैं-

  • सेंसेक्स बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का index है जबकि निफ्टी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का index है।
  • सेंसेक्स के अंदर BSE की टॉप 30 कंपनीस आती है जबकि निफ्टी के अंदर NSE की टॉप 50 कंपनीस आती है।
  • Nifty को कैलकुलेट करते वक्त Base year 1995 और Base Value को 1000 लिया जाता है जबकि Sensex को कैलकुलेट करते वक्त Base year 1979 और Base Value को 100 लिया जाता है।

Final words

अगर आप यहां तक आ गए हैं तो मैं आशा करता हूं कि आपकी सेंसेक्स और निफ्टी के बारे में सारी confusion दूर हो गई होगी और आपको आपके सभी सवालों का जवाब भी मिल गया होगा जैसे: Sensex और Nifty क्या हैं, इनमें क्या अंतर है और इन्हें कैसे कैलकुलेट करते हैं।

लेकिन अगर अभी भी आपका कोई सवाल है तो हमसे नीचे दिए गए कमेंट बॉक्स में पूछ सकते हैं और अगर आपको जानकारी helpful लगी हो तो आप इस पोस्ट को अपने उन दोस्तों के साथ शेयर करें जो शेयर मार्केट के बारे में सीखना चाहते हैं।

Deepak SenAbout Author
मेरा नाम दीपक सेन है और मैं इस ब्लॉग का संस्थापक हूं। यहां पर मैं अपने पाठकों के लिए नियमित रूप से शेयर मार्केट, निवेश और फाइनेंस से संबंधित उपयोगी जानकारी शेयर करता हूं। ❤️

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